डॉ. बिश्वनाथ तिवारी ने अल्ट्रामान ऑस्ट्रेलिया – 2026 में भारत के लिए रचा इतिहास

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली : इंडियन रेलवे पीजीआई एवं एनआरसीएच, नई दिल्ली के सर्जरी एवं सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. बिश्वनाथ तिवारी ने अल्ट्रामान ऑस्ट्रेलिया -2026 में प्रतिष्ठित अल्ट्रामान मैडल जीतकर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ वे भारतीय रेलवे के पहले खिलाड़ी तथा भारत के पहले डॉक्टर बन गए हैं जिन्होंने यह कठिन उपलब्धि हासिल की।

विश्वभर से आए 37 श्रेष्ठ एथलीटों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए डॉ. तिवारी ने दुनिया की सबसे कठिन सहनशक्ति प्रतियोगिताओं में से एक अल्ट्रामान ट्रायथलों सफलतापूर्वक पूरा किया। यह प्रतियोगिता मानव सहनशक्ति, अनुशासन, समर्पण, त्याग और मानसिक दृढ़ता की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाती है।

तीन दिनों तक चलने वाली इस चुनौती में शामिल था:

  • पहला दिन: 10 किमी समुद्री तैराकी एवं 145 किमी साइक्लिंग
  • दूसरा दिन: 281 किमी साइक्लिंग
  • तीसरा दिन: 84 किमी अल्ट्रामैराथन दौड़

पूरी प्रतियोगिता को निर्धारित कट-ऑफ समय के भीतर तथा कुल 36 घंटे में पूरा करना अनिवार्य होता है।

डॉ. तिवारी ने यह कठिन चुनौती 32 घंटे 8 मिनट में पूरी की, जिसमें उन्होंने:

  • 10 किमी समुद्री तैराकी
  • 421 किमी साइक्लिंग
  • 84 किमी दौड़

सफलतापूर्वक पूरी की।

अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर डॉ. तिवारी ने कहा कि अल्ट्रामान केवल एक रेस नहीं, बल्कि मानव संकल्प, धैर्य, विनम्रता, अनुशासन और शरीर एवं मन की असीम क्षमता का उत्सव है।

यह उपलब्धि भारतीय रेलवे, भारतीय चिकित्सा जगत तथा देशभर के सर्जनों के लिए गर्व का क्षण है।

डॉ. तिवारी ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी डॉ. मिताली तिवारी को दिया, जिन्होंने कठिन प्रशिक्षण के दौरान हर कदम पर उनका साथ दिया। उन्होंने अपने बच्चों सोम एवं ओम तथा अपने माता-पिता के आशीर्वाद और त्याग के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

उन्होंने भारत से डॉ. प्रो. ए.के. शर्मा, मीनू शर्मा एवं अखिल सेठी तथा ऑस्ट्रेलिया से इयान ब्लैंचर्ड एवं नैन्सी ब्लैंचर्ड द्वारा मिले उत्कृष्ट सहयोग के लिए विशेष धन्यवाद दिया।

डॉ. तिवारी ने अपनी यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारत, भारतीय रेलवे, भारतीय चिकित्सा समुदाय तथा उन सभी सपने देखने वालों को समर्पित की, जो मानते हैं कि समर्पण, अनुशासन और निरंतर प्रयास से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।

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