
सुशी सक्सेना : विद्यार्थियों में मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन विकसित करने के उद्देश्य से जगरानी प्रकल्प द्वारा ‘Mindfulness for Young Minds’ विषय पर विशेष व्याख्यान एवं पुस्तक समीक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों और विद्यार्थियों को सजगता, ध्यान, श्वास तकनीक तथा तनाव प्रबंधन के महत्व से परिचित कराना और उन्हें स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में विज्ञान एवं साहित्य के क्षेत्र से जुड़ी सुशी सक्सेना, जगरानी प्रकल्प की डॉली प्रियदर्शनी, पूर्व शिक्षिका एवं लेखिका सुषमा सिन्हा तथा समन्वयक पूजा अग्रवाल उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में युग पुरुष धाम बौद्धिक विकास केंद्र से अनीता शर्मा शामिल हुईं।
विशेष बच्चों के कल्याण और उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित अनीता शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके केंद्र में वर्तमान में 40 विशेष बच्चे सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक शिक्षा एवं अन्य गतिविधियों के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले लगभग 20 वर्षों तक छात्रावास के माध्यम से 200 बच्चों की देखभाल की जाती थी, जिनमें मानसिक दिव्यांग एवं अनाथ बच्चे भी शामिल थे। उन्होंने यह भी बताया कि विशेष बच्चों के लिए गठित उनके समूह से मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों की बाल कल्याण समितियों के अधिकारी, चिकित्सक और अभिभावक जुड़े हुए हैं। यह समूह विशेष बच्चों की आवश्यकताओं, देखभाल और उनके बेहतर भविष्य के लिए मिलकर कार्य करता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को माइंडफुलनेस (सजगता), श्वास तकनीक, एकाग्रता और तनाव प्रबंधन के सरल एवं प्रभावी अभ्यास कराए गए। साथ ही गाइडेड विज़ुअलाइज़ेशन, फोकस्ड अटेंशन और लविंग-काइंडनेस मेडिटेशन जैसी ध्यान पद्धतियों की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को पुस्तक समीक्षा और अन्य व्याख्यान के माध्यम से बताया गया कि नियमित ध्यान अभ्यास मन को शांत रखने, विचारों को व्यवस्थित करने, भावनाओं को समझने और दैनिक जीवन की चुनौतियों का सकारात्मक ढंग से सामना करने में सहायक हो सकता है। कार्यक्रम में विज्ञान से संबंधित जानकारियों के माध्यम से भी विद्यार्थियों को मानसिक सजगता और समग्र कल्याण के महत्व से परिचित कराया गया। व्याख्यान एवं पुस्तक समीक्षा के इस आयोजन ने शिक्षा, विज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम का संदेश था कि सजगता और ध्यान केवल विशेष अवसरों तक सीमित न रहें, बल्कि इन्हें दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए। नियमित अभ्यास से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, धैर्य, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन विकसित करने की दिशा में सकारात्मक पहल की जा सकती है। ‘सजग मन, शांत जीवन और सशक्त भविष्य की ओर एक कदम’ की भावना के साथ आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के समग्र विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला रहा।
