एनईपी – 2020 के विविध आयामों पर बीबीएयू में मंथन, विकसित भारत के रोडमैप पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार 5 अगस्त को प्रबंध अध्ययन विभाग की ओर से ‘एनईपी 2020 : विकसित भारत के लिए शिक्षा में परिवर्तन और उत्कृष्टता को बढ़ावा (NEP2020 : Transforming Education and Foster Excellence for Viksit Bharat) विषय पर आयोजित द्विदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि की तौर पर डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस, मुम्बई के सीईओ दीपक कुमार लल्ला, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कामर्स के संकायाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार सिंह एवं कार्यक्रम समन्वयक प्रो. तरुणा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। विश्वविद्यालय कुलगीत गायन के पश्चात आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को पौंधा भेंट करके उनका स्वागत किया गया। सर्वप्रथम कार्यक्रम समन्वयक प्रो. तरुणा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया एवं सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया।          विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि हमें यह समझने और विश्लेषण करने की आवश्यकता है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 किस प्रकार विकसित भारत-2047 के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तन का मूल आधार है तथा इसके माध्यम से ही एक सशक्त, समावेशी और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण संभव है। इसके लिए शिक्षा को तीन प्रमुख आयामों जैसे नोइंग (Knowing) अर्थात स्वयं को जानना एवं पहचानना, डूइंग(Doing) यानी समाज एवं राष्ट्र के कल्याण के लिए कार्य करना तथा बींग (Being) अर्थात एक उत्तरदायी एवं आदर्श नागरिक बनने पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब ये तीनों तत्व शिक्षा के साथ समन्वित होते हैं, तभी समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है। प्रो. मित्तल ने बताया कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा अनुसंधान एवं विकास को विशेष प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें केवल रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनना होगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सके। उन्होंने भारतीय समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी बल देते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे समाज की वास्तविक समस्याओं से जुड़े शोध कार्यों को बढ़ावा दें तथा उनके प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।         मुख्य अतिथि एवं डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह ने चर्चा के दौरान कहा कि युवा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के सबसे सशक्त माध्यम हैं और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को सही मायने में समझने के लिए उसके सामाजिक, ऐतिहासिक एवं संवैधानिक संदर्भ को जानना आवश्यक है। केवल विधिक प्रावधानों का अध्ययन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके उद्देश्य, पृष्ठभूमि और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से कानून के व्यावहारिक पक्ष, न्यायिक दृष्टिकोण और समसामयिक चुनौतियों का गंभीरता से अध्ययन करने का आह्वान करते हुए कहा कि विधि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अधिवक्ता तैयार करना नहीं, बल्कि संवेदनशील, उत्तरदायी और न्यायप्रिय नागरिकों का निर्माण करना भी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जागरूक, नैतिक और विधि-सम्मत दृष्टिकोण रखने वाले युवा ही विकसित भारत के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।          इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस, मुम्बई के सीईओ दीपक कुमार लल्ला ने कहा कि यदि भारत को वास्तविक अर्थों में प्रगतिपथ पर अग्रसर करना है, तो प्रति व्यक्ति आय में सतत वृद्धि सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना समय की सबसे बड़ी मांग है। आज का युग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा विश्लेषण, साइबर सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों का है, इसीलिए युवाओं को सदैव गतिशील, नवाचारोन्मुख तथा परिवर्तन के प्रति सजग रहना होगा। श्री कुमार ने इस बात पर भी बल दिया कि शिक्षा व्यवस्था को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाए, ताकि विद्यार्थी उद्योग-सक्षम बन सकें। इसके लिए युवाओं में क्रिटिकल थिंकिंग, रोजगारपरक कौशल तथा शैक्षणिक ज्ञान और व्यावहारिक जीवन के अनुभवों का संतुलित समन्वय विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे सक्षम, कुशल और नवाचारी युवा ही विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की सशक्त आधारशिला बनेंगे।          ‌इस अवसर पर ‘स्वदेशी उद्यमिता : आत्मनिर्भर भारत की ओर एक सशक्त कदम (Swadeshi Enterpreneurship : A Step Towards a Self Reliant India) विषय पर लिखित पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी की प्रो. सुनीता भर्तवाल एवं बीबीएयू के प्रबंध अध्ययन विभाग की डॉ. लता बाजपेई द्वारा संयुक्त रूप से लिखी गई है। इसके पश्चात आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं शॉल भेंट करके उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। अंत में प्रो. अमित कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।           कार्यक्रम के दौरान आयोजन समिति की ओर से एक पैनल चर्चा सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के विभिन्न आयामों एवं विकसित भारत के निर्माण में उसकी भूमिका पर विस्तृत एवं सार्थक विमर्श किया गया। पैनल चर्चा के दौरान मुख्य तौर पर आईसीएआर – नेशनल ब्यूरो ऑफ फिश जैनेटिक रिसोर्सेज, लखनऊ के निदेशक डॉ. काजल चक्रवर्ती, आईसीएआर- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ शुगरकेन रिसर्च, लखनऊ के डॉ. टी.के. श्रीवास्तव, आईसीएआर- सेंट्रल साॅइल सेलिनिटी रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. अनूप कुमार दीक्षित एवं मेजर विराट मिश्रा मौजूद रहे। पैनल सत्र के दौरान कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने शिक्षा में बहुविषयक दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि फैकल्टी एक्सचेंज, स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम तथा विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग और साझेदारी के माध्यम से नवाचार और उद्यमिता को प्रभावी रूप से बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने इस प्रकार के शैक्षणिक सहयोग को विकसित भारत के निर्माण और युवाओं को आत्मनिर्भर एवं सृजनशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।          इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों के लिए प्लेनरी सेशन का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य तौर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज की संकायाध्यक्ष प्रो. संगीता सिंह, मार्डन कॉलेज ऑफ बिजनेस एंड साइंस, ओमान के डॉ. धर्मेंद्र सिंह, ओमैक्स लिमिटेड, लखनऊ के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं बिजनेस हेड श्री अंजनी कुमार पाण्डेय उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त चाओयांग यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्नोलॉजी, ताइवान के डिपार्टमेंट ऑफ इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट के डॉ. विनोद कुमार ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।          संगोष्ठी के पहले दिन प्रतिभागियों के लिए दो तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। प्रथम तकनीकी सत्र मेजर विराट मिश्रा और बीबीएयू के डॉ. कृष्ण मुरारी के मार्गदर्शन में ‘राष्ट्र निर्माण के लिए शिक्षा – विकसित भारत @2047(Education for Nation Building :Viksit Bharat @2047)  विषय पर आयोजित किया गया। जबकि द्वितीय तकनीकी सत्र गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा के प्रो. एम.सी. गर्ग‌ एवं बीबीएयू के प्रो. सुभाष कुमार यादव के दिशानिर्देशन में ‘शासन, लोक नीति, नेतृत्व एवं प्रबंधन (Governance, Public Policy, Leadership and Management)’ विषय पर आयोजित किया गया। अंत में आयोजन समिति की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई।   समस्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी,‌ शोधार्थी ‌और विद्यार्थी मौजूद रहे।

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