जब किसी देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली ध्वस्त होती है तो युवाओं का भविष्य बर्बाद हो जाता है : अखिलेश यादव

राहुल यादव , लखनऊ / प्रयागराज : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सोमवार प्रयागराज में विजन इंडिया कार्यक्रम में शामिल हुए। विजन इंडिया कार्यक्रम में ‘शिक्षा-परीक्षा- क्यों ध्वस्त हुई व्यवस्था‘ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षा बुनियाद है। जब किसी देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली ध्वस्त हो जाती है तो युवाओं का भविष्य बर्बाद हो जाता है। शिक्षकों पर काम का अधिक बोझ, लगातार पेपर लीक, परीक्षाएं रद्द होने, बेरोजगारी बढ़ने से मानसिक तनाव बढ़ता है। जब परीक्षाएं नहीं हुई तो मानसिक तनाव के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने आत्महत्या तक कर ली। जिससे परिवार के सामने संकट पैदा हुआ है। देखा जा रहा कि तमाम कोशिशों के बाद भी सरकारें पेपर लीक नहीं रोक पा रही है।

यादव ने कहा कि जब योग्यता की अनदेखी की जाती है तो देश की बड़ी आबादी की ताकत एक बड़ी आपदा बन जाती है। दस साल पहले जब हम कहते थे कि डेमोग्रेफिक डेविडेंट में हम बहुत आगे है। हमारे छात्रों में बहुत ऊर्जा है। लेकिन वही ताकत आपदा में बदलती जा रही है। बढ़ती आबादी के नौजवानों को अगर सही शिक्षा और रोजगार नहीं दे पाए तो वह आपदा में बदल जाएगी। छात्र उम्मीद खोते जा रहे हैं। आज बड़ा सवाल है कि देश कैसे आगे बढ़ेगा। सरकार ने केजी से लेकर पीजी तक पूरी शिक्षा व्यवस्था को बीमार कर दिया है। सरकार हजारों सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है। विश्वविद्यालय संकीर्ण राजनीति का शिकार हो गए है। अगर बेसिक शिक्षा ही समाप्त हो जाए, जिस तरह से नियुक्तियां हो रही उस पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं तो उम्मीद कहां बच रही है। समस्या का मूल भाजपा और उनके संगी साथियों का वर्चस्ववादी, रुढ़िवादी सोच में कई परतों के नीचे छिपा है। शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी व शैक्षिक व्यवस्था को राजनीतिक सत्ता बचाने के लिए गुप्त चाल बना दिया गया है। अगर इस तरह चाल चली जाएगी तो संकट पैदा हो जाएगा।

अखिलेश यादव ने कहा कि शिक्षकों को तरह-तरह के कामों में लगा दिया जाता है। तो कभी चारा इकट्ठा करने में ड्यूटी लगा दी जाती है। उनका मनोबल गिराने के लिए कभी पाठ्यक्रम बदलते है, कभी यूनिफार्म तो कभी परीक्षाओं में जातिवादी प्रश्न पूछे जाते है। जब परीक्षाओं को लेकर बड़ी-बड़ी कमेटियां बनायी जाती है तो जातिवादी प्रश्न कैसे पूछे जाते हैं? गांव का प्राइमरी स्कूल मर्जर के नाम पर बंद कर दिया जाता है, जरा उस छह साल की छोटी बच्ची के बारे में सोचिए जिसे पढ़ाई के लिए तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। रास्ते मंे डर। स्कूल में शौचालय नहीं। ऑगनबाड़ी में मायूसी। देश के बच्चों के लिए भाजपा सरकार के पास पैसे नहीं है, लेकिन अपने विज्ञापन के लिए खजाना खुला है। हर विभाग से बजट कटौती कर विज्ञापनों पर खर्च किया जाता है।

अच्छी शिक्षा के लिए जितने बजट की सलाह दी गयी है, इस सरकार में शिक्षा का बजट उससे आधे से भी कम है, जो दर्शाता है कि आज शिक्षा की बदहाली के लिए कोई सोच काम नहीं कर रही है। जब बुनियादी शिक्षा के लिए बजट नहीं है तो रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए सोचना बे-मानी होगी। यह सरकार रिसर्च और डेवलपमेंट का बजट भी विज्ञापन पर खर्च कर रही है। केजी से विश्वविद्यालय तक हर क्लास में संघर्ष करना पड़ता है। आधारभूत ढ़ांचे की कमी। कहीं कुर्सी मेज नहीं, कहीं कापी-किताब और कहीं मिड-डे-मील नहीं। कहीं लैब नहीं, खेल का मैदान बिल्डरों को बेंच दिया जाता है। फीस की कमी से लाखों बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं।

स्कूल का पाठ्यक्रम कुछ होता है, प्रवेश परीक्षाओं में सवाल कुछ और आते हैं, इसी गैप को भरने के लिए टयूशन और कोचिंग की जरूरत पड़ती है।

अखिलेश यादव ने कहा कि कॉलेजों में प्रोफेसर नहीं है। सिर्फ गेस्ट फैकेल्टी पढ़ा रही है। पद खाली पड़े हैं क्योंकि सरकार ने नाट फाउण्ड सुटेबल का बोर्ड टांग दिया है। शिक्षक है, कम्पटेटिव है, लेकिन पता नहीं क्यों सरकार नाट फाउण्ड सुटेबल बता कर रिजेक्ट कर देती है। शिक्षा के सभी विभागों में एनएफएस का बोर्ड टांग कर नौकरियां छीनने का काम हो रहा है। नियुक्तियों में आरक्षण की धांधली हो रही है। आए दिन पक्षपात देखने को मिल रहा है। छात्रवृत्ति कई महीने अटकी रहती है। शिक्षा महंगी होती जा रही है। गरीब का बच्चा पहले ही साल पढ़ाई छोड़ देता है, अमीर का बच्चा कहीं भी पढ़ सकता है, यह स्थिति निन्दनीय और चिंतनीय है।

उन्होंने कहा कि इस सबके बाद जब युवाओं को नौकरी नहीं मिलती है तो यह स्थिति देश के लिए चुनौती बन जाती है। इन सबका सबसे ज्यादा खामियाजा लड़कियों को भुगतना पड़ता है। जिन्हें उम्र बढ़ते ही सुरक्षा के नाम पर स्कूल कालेज दूर होने, ट्वायलेट फैसिल्टी न होने के कारण मां-बाप उनकी पढ़ाई बीच में छुड़वा देते है। अगर अनुपात देखे तो बड़े पैमाने पर बेटियां पढ़ाई छोड़ देती है। जब देश की आधी आबादी पढ़ेगी नहीं तो बढ़ेगी कैसे? देश की तरक्की में योगदान कैसे दे पायेंगी।

यादव ने कहा कि वर्तमान सरकार में घोर भ्रष्टाचार के कारण शिक्षा और परीक्षा ध्वस्त हो गयी है। सरकार जानबूझ कर षिक्षा व्यवस्था ध्वस्त कर रही है। परीक्षाएं लीक हो रही है। पेपर सेंटर से लेकर हर कड़ी तक पैसे पहुंचने के कारण पूरा सिस्टम बिक गया है। मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्य छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है। सरकार अपनी गलती नहीं मानती है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग बेशर्मी से टाल देती है। समस्या की जड़ में वर्तमान सरकार का भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा कि पिछलें दस साल की सरकार में देखा गया है भाजपा के एजेण्डे में नौकरी नहीं है। अगर सरकार के एजेण्डे में नौकरी, रोजगार होती तो इतने पेपर लीक नहीं होते, परीक्षाएं रद्द नहीं होती।

यादव ने कहा कि भाजपा सरकार का नौकरी न देने के पीछे पहला कारण भाजपाईयों का पैसा कमाना है। युवा चुनाव में अपना गुस्सा निकालेंगे लेकिन भाजपा हेराफेरी से चुनाव जीतने का मंसूबा पाले रहती है। वह युवाओं के पक्ष में नहीं सोचती है। नौकरी न देने का दूसरा कारण है, कर्मचारियों का वेतन राजकोष से निकलता हैं, जिससे भाजपाइयों को कमीशन नहीं मिल पाता है इसीलिए वे संविदा की बात करते हैं। भाजपा सरकार में ठेकेदारों से कमीशन उगाहने में वर्ल्ड रिकॉर्ड बन चुका है।

भाजपा सरकार स्थायी नौकरी न देकर संविदा के माध्यम से पीडीए के आरक्षण की लूट करती है। जब संविदा पर नौकरी होगी तो आरक्षण नहीं देना होगा। जब भाजपाईयों ने 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण मार दिया तो संविदा पर कितना घोटाला है इसकी कल्पना नहीं कर सकते। भाजपा परीक्षा प्रणाली का दशासन है। इसके दस चेहरे है।

इस दशानन के दस रूप है। परीक्षा में हेरफेर करने वाले भाजपाई, पेपर छपाने वाले भाजपाई, पेपर लीक कराने वाले भाजपाई, परीक्षा की डेट टलवाने वाले भाजपाई। परीक्षा रद्द करने वाले, मूल्यांकन में कापी बदलने वाले भाजपाई। आरक्षण मारने वाले, रिजल्ट लटकाने वाले भाजपाई, भर्ती कोर्ट में ले जाने वाले भाजपाई, कोर्ट में जानबूझ कर हार जाने वाले भाजपाई। इन सबके पीछे बहुत बड़ी साजिश काम कर रही है। इनकी मंशा 95 फीसदी पीडीए समाज के लोगों को 5 फीसदी प्रभुत्वशाली लोगों के लिए मजदूर के रूप में उपलब्ध कराना है। जिससे कम कीमत पर ज्यादा शोषण कर सके।

यादव ने कहा कि शिक्षा को लेकर साजिश और षडयंत्र चल रहा है। सबसे पहले इन्होंने प्राइमरी शिक्षा पर हमला किया। मुख्यमंत्री जी के जिले में 500 प्राइमरी स्कूल बंद हो गये, पूरे यूपी में 20 हजार से ज्यादा प्राइमरी स्कूल बंद हो गये। सोचिए यूपी में प्राइमरी स्कूल की हालत क्या होगी। उन्होंने कहा कि न्यू इंडिया के सपने को साकार करने, पीडीए को केजी से पीजी तक शिक्षा का हक दिलवाने के लिए। पीड़ा और दुःख के दुष्चक्र के बाहर ले जाने के लिए हम सब मिलकर शिक्षा, परीक्षा को बेहतर रास्ते पर ले जाएंगे। शिक्षा अच्छी होगी, परीक्षा अच्छी होगी तो तरक्की पक्की होगी।

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