योग महोत्सव के तहत बीबीएयू में हुआ भव्य योग दिवस आयोजन, बच्चों ने प्रस्तुत किया आकर्षक योग-नृत्य

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में रविवार 21 जून को ’12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में तथा योग विभाग और योग वेलनेस सेंटर, बीबीएयू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य तौर पर प्रो. सनातन नायक, कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, आईक्यूएसी डॉयरेक्टर प्रो. शिल्पी वर्मा, योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह एवं डॉ. शरद सोनकर मौजूद रहे।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर समस्त विश्वविद्यालय परिवार, विद्यार्थियों, शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन एवं गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत है, जिसने आज विश्व स्तर पर मानव कल्याण के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का आधार है। कुलपति प्रो. मित्तल ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, अनियमित जीवनशैली एवं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरा है। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति की एकाग्रता, कार्यक्षमता तथा मानसिक दृढ़ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएं तथा स्वस्थ, सुखी और समृद्ध समाज के निर्माण में योगदान दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि योग के माध्यम से हम व्यक्तिगत एवं सामाजिक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं तथा ‘स्वस्थ भारत’ के संकल्प को साकार कर सकते हैं।

प्रो. सनातन नायक ने कहा कि योग केवल एक व्यायाम पद्धति नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और सकारात्मक बनाने की एक समग्र जीवनशैली है। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित होता है, जिससे जीवन में संतुलन, अनुशासन एवं आत्मविश्वास का विकास होता है। योग तनाव को कम करने, मानसिक शांति बनाए रखने तथा स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है। प्रो. नायक ने सभी से अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाने का आग्रह किया तथा कहा कि योग के माध्यम से हम न केवल स्वयं को स्वस्थ रख सकते हैं, बल्कि एक जागरूक, स्वस्थ एवं सशक्त समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह ने सभी प्रतिभागियों को योग एवं विभिन्न आसनों के महत्व की जानकारी देते हुए कहा कि योग स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का आधार है। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, मानसिक शांति प्राप्त होती है तथा जीवन में सकारात्मकता का विकास होता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न योगासन शरीर को सुदृढ़ बनाने, एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव को कम करने में सहायक हैं। साथ ही, योग व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सभी से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल के अंतर्गत विभिन्न योगासनों, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास किया। योग विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में आयोजित इस सत्र में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए योग के माध्यम से स्वस्थ एवं संतुलित जीवन का संदेश ग्रहण किया। इसके पश्चात छोटे बच्चों द्वारा आकर्षक योग-नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इस प्रस्तुति के माध्यम से बच्चों ने विभिन्न योगासनों एवं योग मुद्राओं का सुंदर प्रदर्शन करते हुए योग के महत्व का संदेश दिया। बच्चों के उत्साह, ऊर्जा एवं मनमोहक प्रस्तुति ने उपस्थित सभी दर्शकों का मन मोह लिया तथा कार्यक्रम में विशेष आकर्षण का केंद्र बनी।

कार्यक्रम के दौरान योग कार्यशाला में सहभागिता करने वाले बच्चों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय में विगत एक माह से विविध योग संबंधी कार्यक्रमों, कार्यशालाओं , जागरूकता अभियानों एवं अभ्यास सत्रों का आयोजन किया गया और विश्वविद्यालय द्वारा इस संपूर्ण अभियान को ‘योग महोत्सव’ के रूप में मनाया गया।
अंत में डॉ. दीपेश्वर सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के दौरान प्रो. बी.सी. यादव, डॉ. सुनील गोरिया, डॉ. मनोज कुमार डडवाल, डॉ. नरेंद्र सिंह, अन्य शिक्षक, शोधार्थी, योग साधक, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

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