
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार 10 जून को उद्यान विभाग, बीबीएयू एवं युवराष्ट्र, अवध प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में ‘कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इसके अतिरिक्त मंच पर मुख्य अतिथि एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अवध प्रांत के सह प्रांत प्रचारक संजय जी, डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विद्यापीठ की संकायाध्यक्ष प्रो. दीपा एच. द्विवेदी, उद्यान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एम.एल. मीणा एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. रवि शंकर वर्मा उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में ‘कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव’ विषय पर विस्तार से विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य का कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा तथा किसानों की आजीविका पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने प्रकृति के साथ संतुलित संबंध स्थापित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए सभी से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। प्रो. मित्तल ने कहा कि जल, भूमि, वन एवं जैव विविधता जैसे प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण और सतत् उपयोग वर्तमान समय की आवश्यकता है। साथ ही उन्होंने वृक्षारोपण, संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति जागरूक एवं उत्तरदायी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

मुख्य अतिथि संजय ने जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों एवं फसलों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बदलते मौसम चक्र, अनियमित वर्षा तथा बढ़ते तापमान के कारण कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
इस अवसर पर प्रो. एस. विक्टर बाबू, प्रो. दीपा एच. द्विवेदी, प्रो. एम.एल. मीणा एवं डॉ. रविशंकर वर्मा ने भी अपने विचार साझा करते हुए जलवायु परिवर्तन के विभिन्न आयामों तथा कृषि क्षेत्र पर उसके दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बदलती जलवायु परिस्थितियों के कारण कृषि उत्पादन, प्राकृतिक संसाधनों एवं खाद्य सुरक्षा के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों पर विशेष चर्चा की।
संगोष्ठी के दौरान विभिन्न शिक्षक, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी, किसान मौजूद रहे।
