कृषि विज्ञान केन्द्र गनीवां में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस एवं मूंग फसल का प्रक्षेत्र दिवस पर भव्य कार्यक्रम आयोजित

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : कृषि विज्ञान केन्द्र, गनीवां, चित्रकूट द्वारा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर एक भव्य एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम का मुख्य विषय “वर्तमान वैश्विक संकट को कम करने में समाज की भूमिका” रखा गया, जिसमें विशेष रूप से कृषि में ईंधन एवं रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में जिले के विभिन्न गांवों से आए लगभग 110 किसान (महिला एवं पुरुष कृषक) उपस्थित रहे, जिनमें अधिकांश ग्रीष्मकालीन मूंग उत्पादक किसान शामिल थे। किसानों ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता करते हुए वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों से तकनीकी जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री रतन जी जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में राजवीर प्रबंधक, इफ्फको, अनिल सिंह निदेशक, जन शिक्षण संस्थान, चित्रकूट एवं जितेन्द्र सिंह समाज शिल्पी दम्पति शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राजेन्द्र सिंह नेगी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, केवीके चित्रकूट द्वारा की गई, जबकि कार्यक्रम का संयोजन एवं सफल संचालन डॉ. उत्तम कुमार त्रिपाठी वैज्ञानिक, कृषि प्रसार द्वारा किया गया। इस दौरान राजकुमार उप निदेशक कृषि का भी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. नेगी ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, बढ़ती ऊर्जा लागत एवं मृदा उर्वरता में गिरावट जैसे वैश्विक संकटों का समाधान केवल वैज्ञानिक तकनीकों के साथ-साथ समाज की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने किसानों को उर्वरकों एवं डीजल जैसे संसाधनों के संतुलित उपयोग के साथ-साथ जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि रतन जी ने अपने संबोधन में कहा कि नाबार्ड द्वारा किसानों की आय वृद्धि एवं टिकाऊ कृषि के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ लेकर किसान अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं। उन्होंने ऊर्जा दक्ष कृषि तकनीकों को अपनाने पर बल दिया।

राजवीर इफको ने उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग, मृदा परीक्षण के महत्व तथा नैनो उर्वरकों के प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अनिल सिंह निदेशक ने कौशल विकास एवं ग्रामीण युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्हें कृषि आधारित उद्यमों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं जितेन्द्र सिंह ने समाज की सहभागिता एवं सामूहिक प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को ईंधन की बचत हेतु उन्नत कृषि यंत्रों के उपयोग, फसल विविधीकरण, एवं कम लागत वाली तकनीकों के बारे में भी जानकारी प्रदान की गई। साथ ही, मृदा स्वास्थ्य सुधार के लिए जैविक खाद, हरी खाद एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम के उपरांत जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग (ग्रीन ग्राम) फसल के प्रचार-प्रसार हेतु एक प्रक्षेत्र दिवस (Field Day) का आयोजन किया गया। यह प्रक्षेत्र दिवस रोहित कुमार एवं अभय कुमार के खेत पर आयोजित किया गया, जहाँ उन्नत किस्मों एवं वैज्ञानिक पद्धति से की गई मूंग की खेती का प्रदर्शन किया गया। किसानों ने फसल की उत्कृष्ट वृद्धि एवं उत्पादन क्षमता का अवलोकन किया तथा विशेषज्ञों से सीधी बातचीत कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

विशेषज्ञों द्वारा किसानों को मूंग की फसल में उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जल संरक्षण तकनीक, एवं कीट-रोग नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही, यह भी बताया गया कि मूंग जैसी दलहनी फसलें मृदा की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होती हैं और कम लागत में अधिक लाभ प्रदान कर सकती हैं।

कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा किसानों से अपील की गई कि वे वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर सतत एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि की दिशा में आगे बढ़ें। इस सफल आयोजन ने जिले के किसानों में नई जागरूकता एवं उत्साह का संचार किया।

Related Articles

Back to top button