
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : दीनदयाल शोध संस्थान के स्वास्थ्य प्रकल्प आरोग्यधाम के द्वारा शनिवार को उद्यमिता विद्यापीठ के लोहिया सभागार में परंपरागत वैद्यों के दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ सन्त सीताशरण महाराज जानकी महल, डॉ आलोक चौबे कुलगुरु महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, रामबेटा कुशवाहा जिला संघचालक सतना, अपराजित शुक्ला सचिव दीनदयाल शोध संस्थान, वैद्य राजेन्द्र पटेल द्वारा भगवान धनवंतरी की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के पश्चात कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ।
दीनदयाल शोध संस्थान के शोध शाला प्रभारी डॉ मनोज त्रिपाठी ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परम्परागत वैद्य सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य, ज्ञान और अनुसंधान का आदान-प्रदान, पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण एवं संवर्धन, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा, औषधीय पौधों का ज्ञान, डेटा वेस तैयार करना, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता के साथ- साथ समग्र स्वास्थ्य प्रदान करना है एवं ‘आयुर्वेद से आरोग्य’ के संदेश के साथ आगे बढ़ाना है।

आरोग्यधाम के वैद्य राजेन्द्र पटेल ने बताया कि हमारा कार्य कम दवा, कम पैसे व कम समय में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हरी ताजी औषधियों से लोगों को स्वस्थ रखना है। ग्रामीण क्षेत्रों में वैद्यो द्वारा पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के ज्ञान की निरंतरता को बनाये रखना है।
डॉ आलोक चौबे कुलगुरु ने कहा कि हर व्यक्ति को हर मामले में स्वावलंबी बनाना नानाजी का लक्ष्य था। भारत की परंपरागत चिकित्सा प्रणाली सबसे प्राचीन है सभी युगों में आयुर्वेद का महत्व भारतीय प्राचीन पद्धति में रहा है। त्रेता युग में इसका सबसे बड़ा उदाहरण वनवास काल मे मर्यादा पुरुषोत्तम राम के छोटे भाई लक्ष्मण जी को बैद्य द्वारा संजीवनी बूटी से पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान किया गया। जड़ी – बूटियों में देवताओं का निवास होता है और आयुर्वेद में वृक्षों का विशेष महत्व है। आयुर्वेद महाविद्यालय एवं एम्स जैसे ग्रामीण संस्थान और अधिक मात्रा में खोलना चाहिए।
सन्त सीताशरण महाराज ने कहा कि चित्रकूट में हजारों प्रकार की वनौषधियाँ उपलब्ध हैं। राष्ट्रऋषि नाना जी ने इस क्षेत्र में जन सहयोग से चिकित्सा क्षेत्र में अतुलनीय कार्य किया है उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हरी- ताजी औषधियों से आजीवन स्वास्थ्य की संकल्पना को सिद्ध करने के लिए ही आरोग्यधाम की स्थापना की थी जिससे सभी निरोगी रह सकें।
विनीत श्रीवास्तव प्रभारी दिशा दर्शन केंद्र, ने दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा किये जा रहे समाजोमुखी कार्यों का सारगर्वित प्रस्तुतिकरण किया। दो दिनों तक चलने वाले सम्मेलन में प्रथम दिवस दो तकनीकी सत्रों में वैद्यों के ज्ञान का रोगानुसार आदान-प्रदान के अंतर्गत (पक्षाघात, वात, कफ़, पित्त, पेट, नेत्र, कर्ण, मुख, दाँत मधुमेह, रक्तचाप, एनीमिया, पीलिया, दमा, स्नोफीलिया खांसी) जैसी बीमारियों के संबंध में कारण एवं निदान पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ राजीव शुक्ला द्वारा किया गया। कार्यक्रम में दीनदयाल शोध संस्थान के महाप्रबंधक डाॅ अनिल जायसवाल, आरोग्य धाम के ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग के समरजीत सिंह, दयालाल यादव , कामता गौतम, समाजशिल्पी दम्पति प्रभारी डॉ अशोक पाण्डेय, राजेन्द्र सिंह, हरीराम सोनी, अनिल कुमार सिंह निदेशक जन शिक्षण संस्थान , मनोज सैनी प्रभारी उद्यमिता विद्यापीठ सहित संस्थान के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के 3 जिलों तथा उत्तर प्रदेश के 09 जिलों के प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं।