
नरेंद्र तिवारी, सेंधवा : बड़वानी जिला प्रशासन के हर घर जल पहुंचाने के दावे बेहद खोखले और कमजोर साबित होते हुए दिखाई दे रहे हैं, क्षेत्र में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और जल निगम के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पानी कि टंकियों का निर्माण एवं पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया हैं। यह कार्य बहुतसी ग्राम पंचायतों में जारी हैं। इस हेतु सेंधवा विधान सभा क्षेत्रों के ग्रामों कि पड़ताल कि गईं तो जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुंचाने का सपना कमजोर और सरकारी ढकोसला नजर आया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा निर्मित पानी कि टंकियां इन ग्रामो में सीमेंट क्रांकिट के ढाचे के आलावा कुछ नहीं हैं।
पहले बात करते हैं, जल निगम द्वारा निर्माणाधीन उन टंकियों कि जिनका निर्माण तो मार्च 2023 में शुरू होना था। निर्माण एजेंसी एवं विभागीय लापरवाही के परिणाम स्वरूप ग्राम केलपानी, किरचाली एवं कोटकिराड़ी में 3 वर्ष बीतने के बाद भी टंकी से पानी सप्लाई अभी सपना ही दिखाई दे रहा हैं।

जल निगम के बड़वानी जिला मैनेजर से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम केलपानी में लक्ष्मी सिविल इंजिनियर कम्पनी प्रालि कोल्हापुर द्वारा निर्माण किया जा रहा हैं। इस संबंध में ग्राम के सरपंच शोभाराम सोलंकी से बातचीत करने पर उन्होंने बताया टंकी का कार्य अभी बंद हैं। उक्त कार्य में सरिया कमजोर दर्जे का इस्तेमाल किया जा रहा हैं। सीमेंट भी अपेक्षाकृत कम उपयोग कि जा रही हैं। रेत कि गुणवत्ता भी कमजोर हैं। गाँव के सरपंच ने बताया टंकी निर्माण का कार्य दो माह से बंद पढ़ा हैं। निर्धारित समाया अवधि में हर घर नल से जल पहुंचा पाना नामुमकिन सा नजर आ रहा हैं। निर्माण एजेंसी के कर्मचारी अधिकारी जगह पर रहते नहीं, पीएचई के कर्मचारी जल निगम का निर्माण कहकर पल्ला छाड लेते हैं।
सरपंच के अनुसार यहाँ पाइप लाइन बिछाने में भी लापरवाही और धांधली साफ नजर आ रही हैं। गाँव के खेतो में लापरवाही पूर्वक निर्धारित मापदंड के विपरीत बिछाई पाइप लाइन किसानो के खेत जोतने पर बाहर आ गयी हैं। गांव में 75 प्रतिशत पाइप लाइन उखड़ी पढ़ी हैं।
ग्राम किरचाली के पलासिया फलिया में निर्माणाधीन पानी कि टंकी कि निर्माण एजेंसी लक्ष्मी सिविल इंजिनियरिंग सर्विस प्रालि कोल्हापुर हैं। यहाँ भी काम बंद पड़ा हैं। गाँव के सरपंच बर्माजी ने बताया कि हनुमान मंदिर के समीप पाइप लाइन उखड़ गयी हैं। टंकी निर्माण आए दिन बंद पड़ा रहता हैं। पाइप लाइन बिछाने में निर्धारित मापदंड का पालन नहीं किया जा रहा हैं। यही हाल ग्राम कोट किराड़ी में हैं।
पीएचई विभाग द्वारा निर्मित टंकियों का वर्तमान हाल
जनपद के ग्राम आँचली में वर्ष 2022 में पाईप लाइन बिछाने एवं टंकी निर्माण का कार्य सतगुरु इंटर प्राइजेस द्वारा किया गया था। इस बाबद पीएचई के इंजिनियर शिवनारायण छापरिया का कहना हैं कि उक्त टंकी निर्माण एवं पाइप लाइन डालने के बाद ग्राम पंचायत को सौंप दी गयी थी। किंतु ग्राम पंचायत ने चलाने में असमर्थता जताई हैं। मौक़े पर देखने पर गाँव में टंकी से पेयजल वितरण नहीं हो रहा हैं। ग्राम के बारका भाई ने बताया कि टंकी निर्माण के बाद से ही पेयजल वितरण नहीं हुआ हैं।

ग्राम सुरानी में निर्माण एजेंसी के एस गोधानी गुजरात ने 2022 में टंकी निर्माण एवं पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया था। पीएचई इंजिनियर के अनुसार उक्त पानी कि टंकी चालू हैं। किंतु मौक़े पर देखने पर बंद मिली गाँव सुरानी के कैलाश मोरे से बातचीत कि तो उनका कहना हैं कि खेतो में पाइप लाइन उखड़ गयी हैं। गाँव में किसी भी घर में पानी नहीं आता हैं। यहाँ टंकी बने तीन साल से अधिक समय हो गया हैं।
सुरानी के ही महेन्द्र सेनानी ने बताया टंकी से पानी नहीं आने से भीषण गर्मी में जल संकट का सामना करना पड़ रहा हैं। टंकी निर्माण के बाद गाँव कि महिलाओ में आस बंधी थी अब दूर कुएँ एवं हेडपम्प पर पानी लेने नहीं जाना होगा किंतु महिलाए अभी भी दूर से पानी लाने को अभिशप्त हैं। गाँव सुरानी के उप सरपंच माधव सिँह सेनानी ने बताया कि दो साल से टंकी से पेयजल नहीं मिल रहा हैं, गाँव में पेयजल का संकट बना हुआ हैं। टंकी निर्माण के बावजूद घरों में पानी नहीं आ रहा हैं। गाँव के डेहरी फलिया, आमली फलिया एवं सुल्या फलिया के रहवासी दो से तीन किलोमीटर दूर चलकर पानी लाने को मजबूर हैं।
सेंधवा से निकट स्थित ग्राम पंचायत पीपलधार में भी पेयजल संकट बना हुआ हैं विभाग के अनुसार वर्ष 2023 से टंकी से पानी चालू हैं किंतु वस्तु स्थिति जानने पर मौक़े पर टंकी से पानी वितरण नहीं हो रहा हैं। गाँव के पूर्व सरपंच महेश ने बताया टंकी से पानी नहीं मिल रहा। जिस दितिया फलिया में टंकी हैं वहां के लोग कुए एवं हेड पम्प से पिने का पानी ले रहे हैं।

नरेंद्र तिवारी
जनपद सेंधवा के अनेकों गांव में भीषण गर्मी में पिने के पानी का संकट बना हुआ हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के रिकार्ड में जिन गाँवो में टंकी से पेयजल वितरण बताया जा रहा हैं। वहां कि जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयान कर रही हैं।