बीबीएयू में ‘लिविंग द विवेकानंद वे’ पुस्तक पर संवाद सत्र आयोजित: युवाओं को आत्मचिंतन एवं चरित्र निर्माण संदेश

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शुक्रवार 29 मई को ‘लिविंग द विवेकानंद वे : प्रैक्टिकल स्पिरिचुअलिटी फॉर मॉडर्न इंडिया’ पुस्तक पर संवादात्मक चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इस पुस्तक का सह-लेखन अनुवाद सॉल्यूशंस की डॉयरेक्टर डॉ. अनन्या अवस्थी एवं विवेकानंद केंद्र, उत्तर प्रांत के उपप्रमुख डॉ. निखिल यादव द्वारा किया गया है, जो कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर प्रसिद्ध लोकगायिका एवं समाजसेवी श्रीमती मालिनी अवस्थी, शिक्षा विभाग के कार्यवाहक विभागाध्यक्ष डॉ. हरिशंकर सिंह एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुभाष मिश्रा मौजूद रहे।

विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने पुस्तक एवं युवा लेखकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को स्वामी विवेकानंद तथा डॉ. भीमराव अम्बेडकर जैसे महान व्यक्तित्वों के जीवन, विचारों एवं संघर्षों को गहराई से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब विश्व भारत को केवल ‘सांप-सपेरों का देश’ कहता था, किन्तु स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने अपने ज्ञान, विचारों और आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से विश्व मंच पर भारत की नई पहचान स्थापित करने का कार्य किया। प्रो. मित्तल ने कहा कि आज पूरा विश्व भारत की ओर आशा और विश्वास के साथ देख रहा है, क्योंकि यहाँ का योग, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक सोच, सांस्कृतिक परंपराएँ, आध्यात्मिक ज्ञान एवं ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ जैसी जीवन दृष्टि वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रही हैं।

डॉ. अनन्या अवस्थी ने अपने उद्घाटन संबोधन में वर्तमान समय में विश्व के सामने खड़ी गंभीर चुनौतियों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज मानवता भू-राजनीतिक संघर्षों, पर्यावरणीय संकट, सामाजिक असमानताओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दुरुपयोग जैसी उभरती तकनीकों से उत्पन्न नैतिक दुविधाओं तथा युवाओं के बीच बढ़ते मानसिक एवं भावनात्मक तनाव जैसी अनेक जटिल समस्याओं का सामना कर रही है। ऐसे समय में स्वामी विवेकानंद द्वारा प्रस्तुत वेदान्त आधारित भारतीय आध्यात्मिक चिंतन सम्पूर्ण विश्व को नई दिशा प्रदान करने की क्षमता रखता है।

विवेकानंद केंद्र, उत्तर प्रांत के उपप्रमुख डॉ. निखिल यादव ने कहा कि भारत आज विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और वैश्विक नेतृत्व सहित लगभग प्रत्येक क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है तथा स्वतंत्रता के बाद देश ने विकास की एक लंबी और प्रेरणादायक यात्रा तय की है। उन्होंने कहा कि आने वाले बीस वर्ष भारत के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं और यदि देश को वास्तविक अर्थों में एकजुट, सशक्त एवं विकसित बनाना है, तो ‘विवेकानंद मार्ग’ सबसे उपयुक्त और प्रेरणादायी रास्ता सिद्ध हो सकता है। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी को भारत को सही मायनों में समझना है, तो सबसे पहले स्वामी विवेकानंद को पढ़ना चाहिए, क्योंकि उनकी दृष्टि में भारत का एक अद्भुत, जीवंत और आध्यात्मिक चित्रण देखने को मिलता है।

कार्यक्रम के दौरान एक रोचक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने लेखकों से विभिन्न प्रश्न पूछे। इस चर्चा के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक अध्यात्म, युवा सशक्तिकरण, सामाजिक परिवर्तन तथा आधुनिक भारत में स्वामी विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता को समझने का अवसर प्राप्त हुआ।

अंत में डॉ. सुभाष मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समस्त कार्यक्रम के दौरान प्रो. सुनीता मिश्रा, डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, आईक्यूएसी डॉयरेक्टर प्रो. शिल्पी वर्मा,‌ प्रॉक्टर प्रो. राम चंद्रा, प्रो. के. एल. महावर, अन्य शिक्षक, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

Related Articles

Back to top button