
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा के प्रधान संपादकत्व में संचालित तथा विश्व-प्रसिद्ध प्रकाशन संस्था स्प्रिंगर नेचर (Springer Nature) द्वारा प्रकाशित जर्नल एन्वॉयरमेंटल सस्टेनेबिलिटी ने जून 2018 में अपनी स्थापना के बाद आठ वर्षों की असाधारण उपलब्धियों का गौरवपूर्ण सफर पूरा कर लिया है। इस अपेक्षाकृत कम अवधि में जर्नल ने वैश्विक पर्यावरण विज्ञान समुदाय में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करते हुए उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। पर्यावरण विज्ञान एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान के प्रतिष्ठित शोधकर्ता प्रो. डॉ. नवीन कुमार अरोड़ा अपने दूरदर्शी नेतृत्व और उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए जाने जाते हैं।
हाल ही में क्लैरिवेट (Web of Science) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार जर्नल ने 4.6 का प्रभाव कारक (Impact Factor) प्राप्त किया है। अकादमिक प्रकाशन जगत में 4.0 से अधिक का प्रभाव कारक उत्कृष्ट गुणवत्ता का प्रतीक माना जाता है। यह उपलब्धि इसे भारत के पर्यावरण एवं जैविक विज्ञान क्षेत्र के अग्रणी जर्नलों में स्थान दिलाती है। अपने प्रथम मूल्यांकन चक्र से लेकर वर्तमान उत्कृष्ट स्थिति तक, जर्नल ने निरंतर उल्लेखनीय प्रगति करते हुए पर्यावरणीय स्थिरता अनुसंधान के क्षेत्र में सबसे आशाजनक प्रकाशनों में अपनी पहचान बनाई है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि एन्वॉयरमेंटल सस्टेनेबिलिटी जर्नल पर्यावरण और स्थिरता से जुड़े शोध को बढ़ावा देकर अत्यंत सराहनीय कार्य कर रहा है। क्योंकि पर्यावरणीय स्थिरता आज की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है और यह विशेष रूप से आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसीलिए यह महत्वपूर्ण है कि जर्नल सतत विकास लक्ष्यों पर केंद्रित है तथा उनके उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहा है। इसके अतिरिक्त कुलपति जी ने जर्नल की संपादकीय टीम और विशेष रूप से प्रो. नवीन अरोड़ा को भविष्य की सफलताओं के लिए शुभकामनाएँ भी दीं।
इस अवसर पर प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने चर्चा के दौरान कहा कि यह उपलब्धि हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल आठ वर्षों में 4.6 का प्रभाव कारक तथा Q2 रैंकिंग प्राप्त करना इस जर्नल से जुड़े सभी लोगों के समर्पण और कठिन परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने विशेष रूप से स्प्रिंगर नेचर की कार्यकारी प्रकाशक डॉ. ममता कापिला तथा जर्नल की सम्पूर्ण संपादकीय टीम को उनके निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया। प्रो. अरोड़ा ने बताया कि एक नए जर्नल की स्थापना में अत्यधिक समय, परिश्रम और प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में पहले से स्थापित सैकड़ों जर्नलों के बीच अपनी पहचान बनाना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे उनकी टीम ने सफलतापूर्वक पार किया। साथ ही एक विचार से लेकर Q2 श्रेणी के प्रतिष्ठित जर्नल बनने तक की यह यात्रा दूरदर्शी सोच और उसके प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण है।
एन्वॉयरमेंटल सस्टेनेबिलिटी जर्नल की अवधारणा इसके शुभारंभ से लगभग आठ वर्ष पूर्व विकसित हुई थी। विश्व स्तर पर बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों और उन पर केंद्रित गुणवत्तापूर्ण शोध की आवश्यकता को देखते हुए प्रो. नवीन अरोड़ा ने एक ऐसे मंच की कल्पना की, जो समकालीन पर्यावरणीय समस्याओं पर अत्याधुनिक शोध को प्रोत्साहित कर सके। स्प्रिंगर नेचर ने इस आवश्यकता को समझते हुए जून 2018 में इस जर्नल का सफल शुभारंभ किया। यह जर्नल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप शोध कार्यों को प्रोत्साहित, समर्थन और बढ़ावा देता है।
जर्नल की आठ वर्षों की यात्रा उन उपलब्धियों से परिपूर्ण रही है जिन्हें प्राप्त करने में कई दशक लग जाते हैं। अकादमिक प्रकाशन के अत्यंत प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में इसकी यह तीव्र प्रगति अभूतपूर्व मानी जाती है। वर्तमान में यह जर्नल विश्व की प्रमुख इंडेक्सिंग संस्थाओं में सूचीबद्ध है तथा वेब ऑफ साइंस और स्कोपस दोनों में Q2 श्रेणी में वर्गीकृत है। वर्ष 2024 में प्राप्त अपने प्रथम 3.0 प्रभाव कारक के बाद वर्ष 2026 में यह बढ़कर 4.6 हो गया। यह उच्च प्रभाव कारक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जर्नल के उत्कृष्ट उद्धरण प्रदर्शन (Citation Performance) और वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
यह जर्नल पर्यावरण एवं जैविक विज्ञान के क्षेत्र में शोध प्रकाशित करता है तथा शोधार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों को पियर रिव्यूड शोध लेखों एवं विद्वत्तापूर्ण प्रकाशनों तक पहुँच प्रदान करता है। जर्नल का विशेष फोकस ऐसे स्थिरता-आधारित शोध पर है जो प्राकृतिक विज्ञान, अभियांत्रिकी तथा नीतिगत पहलुओं के बीच सेतु का कार्य करता है। आठ वर्षों की इस उल्लेखनीय सफलता का उत्सव मनाते हुए जर्नल विश्वभर के शोधकर्ताओं से उच्च गुणवत्ता वाले शोध-पत्र आमंत्रित कर रहा है, जो पर्यावरणीय स्थिरता की चुनौतियों के समाधान की दिशा में कार्यरत हैं। इसकी Q2 रैंकिंग और प्रभावशाली इंपेक्ट फैक्टर इसे प्रतिष्ठित तथा तीव्र गति से विकसित हो रहे शोध प्रकाशन मंच के रूप में स्थापित करते हैं।
जर्नल के प्रधान संपादक की बीबीएयू से संबद्धता इस उपलब्धि को बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ तथा भारत के लिए भी गौरव का विषय बनाती है। जर्नल को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान प्राप्त है और यह देश के लिए गर्व का विषय है।
