
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : डाॅ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के 13वाँ दीक्षान्त समारोह का शुभारम्भ कुलपति संजय सिंह के द्वारा प्रदेश के राज्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तिकरण एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप की अध्यक्षता में, मुख्य अतिथि के रूप में सांसद राज्यसभा सी सदानंदन मास्टर की उपस्थिति में किया गया। उ0प्र0 की राज्यपाल की अनुपस्तिथि को उनके विशेष कार्याधिकारी सुधीर एम बोबडे ने पूरा किया। दीक्षान्त समारोह में सर्वप्रथम राष्ट्रगीत छात्र/छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात विश्वविद्यालय की कुलगीत की प्रस्तुति की गयी।
विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष की अनुपस्थिति में उनके द्वारा मनोनीत विशेष कार्याधिकारी सुधीर एम बोबडे ने राज्यपाल के सम्बोधन में कहा कि आज इन छात्र/छात्राओं को केवल उपाधि नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी मिली है। उन्होंने कहा कि उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र/छात्राएं अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज को बेहतर बनाने के लिए करें। उन्होंने विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि उनका संघर्ष, साहस और सफलता पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में सत्यनिष्ठा, विनम्रता और सेवा की भावना को सर्वोच्च स्थान देने का आह्वान किया।

राज्य सभा सांसद सी सदानंदन मास्टर ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने सम्बोधन में कहा कि मैं भारत सरकार से अनुरोध करता हूँँ कि डाॅ0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय को सुगम्यता, पुनर्वास, समोवशी शिक्षा, सहायक प्रौद्योगिकी, कौशल विकास तथा अनुसंधान के क्षेत्र में किये जा रहें उत्कृष्ट कार्याें के आधार विशेष दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा कि सफलता का मूल्यांकन केवल व्यावसायिक उपलब्धियों या भौतिक समृद्धि से न करें। उन्होंने छात्र/छात्राओं से कहा कि आज आप को उपाधि नहीं बल्कि उत्तरदायित्व भी सौंपा जा रहा है। आपकी उपाधि केवल सफल कैरियर बनाने के लिए नहीं बल्कि एक संवेदनशील और मानवीय समाज के निर्माण में सहयोग प्रदान करने वाली होनी चाहिए।
प्रदेश के राज्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तिकरण एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को पदक/उपाधि वितरित की गयीं।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह में कुल 1921 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 956 छात्राएं और 965 छात्र शामिल हैं। कुल उपाधियों मंल 17 शोध उपाधियां भी प्रदान की गईं। समारोह में कुल 130 मेधावी छात्र-छात्राओं को 156 पदक प्रदान किए गए। इनमें 76 स्वर्ण, 40 रजत और 40 कांस्य पदक शामिल हैं। स्वर्ण पदकों की बात करें तो 32 छात्राओं को 41 स्वर्ण पदक तथा 25 छात्रों को 35 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इस प्रकार कुल 57 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक मिले। रजत पदकों में 22 छात्राओं को 24 रजत पदक तथा 14 छात्रों को 16 रजत पदक प्रदान किए गए। कुल 36 विद्यार्थियों को रजत पदक मिले। इसी तरह 24 छात्राओं को 26 कांस्य पदक तथा 13 छात्रों को 14 कांस्य पदक प्रदान किए गए। कुल 37 विद्यार्थियों को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। कुल मिलाकर 78 छात्राओं को 91 पदक और 52 छात्रों को 65 पदक प्रदान किए गए। इस प्रकार कुल 130 मेधावी छात्र-छात्राओं को 156 पदकों से सम्मानित किया गया।

दीक्षांत समारोह की एक विशेष उपलब्धि दिव्यांग विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा। कुल 27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने 45 पदक हासिल किए। इनमें 13 दिव्यांग छात्राएं और 14 दिव्यांग छात्र शामिल हैं। इन विद्यार्थियों ने 22 स्वर्ण पदक प्राप्त किए, जिनमें 10 छात्राएं और 12 छात्र शामिल रहे। इसके अलावा एक रजत पदक एक छात्र को तथा चार कांस्य पदक प्रदान किए गए, जिनमें तीन छात्राएं और एक छात्र शामिल हैं। दिव्यांग विद्यार्थियों की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रभावी प्रयासों का प्रमाण बनी। पदक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे।
मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने दीक्षान्त समारोह में उ0प्र0 सरकार द्वारा समाज के पिछड़ा वर्ग व दिव्यांगजन हेतु कराए जा रहें कार्याें का वर्णन करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जहाँ दिव्यांगजनों के लिए दो समर्पित विश्वविद्यालय संचालित हैं। डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ एवं जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयास से राज्य का पहला ब्रेल पुस्तकालय 04 जनवरी 2026 को स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय में स्थापित किया गया जिसमें 5500 के अधिक ब्रेल पुस्तकें, स्नातक एवं परास्नातक के 54 एनईपी आधारित पाठ्यक्रमों के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराई गयी, जिसे वर्ष के अंत तक 10,000 करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही दिव्यांग विद्यार्थियों हेतु प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ब्रेल समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया गया है।
राज्यमंत्री कश्यप ने बताया कि सैनिकों के मुफ्त पुनर्वास हेतु सेना के मिलिट्री हॉस्पिटल (मेरठ) के साथ 25 जून 2026 को हुए समझौते के तहत थल, जल और वायु सेना के दिव्यांग सैनिकों एवं जवानों को मुफ्त कृत्रिम अंग तथा टेलर-मेड प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध कराया जायेगा। विश्वविद्यालय दिव्यांगजनों के लिए समावेशी शिक्षा, तकनीकी नवाचार, कृत्रिम अंग निर्माण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा शोध के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।

मंत्री ने बताया कि सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी) के सहयोग से विश्वविद्यालय अब कृत्रिम पैर के पंजे सहित अन्य स्पेयर पार्ट्स का निर्माण स्वयं अपनी लैब में कर सकेगा। 18 फरवरी 2026 को थ्री-डी लैब की स्थापना की गई, जिससे गुणवत्तापूर्ण कृत्रिम अंगों का तीव्र निर्माण संभव हो सकेगा। उन्होंने बताया कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों की सुगम एवं आत्मनिर्भर आवाजाही के लिए 144.55 एकड़ परिसर में विशेष ‘सुगंध पथ’ तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पुनर्वास परिषद (आर0सी0आई0) द्वारा ‘सेंटर फॉर एक्सीलेंस‘ घोषित किया गया है, जो हम लोगों के लिए गर्व की बात है।
कश्यप जी ने डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय द्वारा खेल उपलब्धि का वर्णन करते हुए बताया कि बी0बी0ए0 की छात्रा संजना कुमारी ने इंडोनेशिया पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल टूर्नामेंट 2025 में कांस्य पदक अर्जित कर देश का मान बढ़ाया। दिव्यांगजनों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक पुनर्वास सेवाओं, अनुसंधान एवं कौशल विकास से जोड़ते हुए डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ ने वर्ष 2025-26 के दौरान अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां अर्जित की हैं।
दीक्षान्त समारोह समापन्न से पूर्व कुलपति संजय सिंह ने प्रदेश के राज्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तिकरण एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप को, सांसद राज्यसभा सी सदानंदन मास्टर जी को, विशेष कार्याधिकारी राज्यपाल सुधीर एम बोबडे को एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह को अंगवस्त्र, पुस्तक एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
दीक्षान्त समारोह में दिव्यांगजन सशक्तिकरणर विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, कुल सचिव रोहित सिंह, परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार मिश्रा, बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के छात्र/छात्राएं सहित आंगनबाड़ी कार्यक्रत्रीयाँ, के अतिरिक्त विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहें।
