
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, जम्मू : उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक कांगड़ा घाटी रेलवे की शान और अमूल्य धरोहर ! स्टीम लोको ZB-66 एक बार फिर पर्यटकों को ‘भाप के युग’ की सैर कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। पर्यटकों और रेल प्रेमियों की भारी मांग को देखते हुए, सोमवार 8 जून 2026 को इस ऐतिहासिक इंजन को रेवाड़ी हेरिटेज शेड से पुनः पठानकोट लाया गया है। आवश्यक मेंटेनेंस के बाद इसे एक बार फिर कांगड़ा घाटी के सुरम्य नैरो गेज (2 फुट 6 इंच) खंड की शोभा बढ़ाएगा।
विरासत को पुनर्जीवित करने का सफर
वर्ष 1952 में यूके के स्टाफोर्ड स्थित डब्ल्यू.जी. बैगनॉल लिमिटेड द्वारा निर्मित इस 2-6-2T व्हील व्यवस्था वाले शक्तिशाली इंजन ने दशकों तक भारतीय रेल की सेवा की। समय के साथ आए घिसाव के कारण वर्ष 2012 तक इसके बॉयलर, टेंडर, अंडर फ्रेम और ड्राइवर केबिन को भारी क्षति पहुंची थी। इस बहुमूल्य धरोहर को लुप्त होने से बचाने का बीड़ा
अमृतसर वर्कशॉप ने उठाया।
वर्कशॉप की तकनीकी कुशलता और कड़ी मेहनत के बल पर मार्च 2017 में इसे सफलतापूर्वक नया जीवनदान दिया गया। इसके बाद, 05 जून 2023 को इसे रेवाड़ी हेरिटेज शेड स्थानांतरित किया गया था, जहां से अब इसकी पठानकोट वापसी हुई है।
ऐतिहासिक सफर और परिचालन का इतिहास
पुनर्जीवित होने के बाद ZB-66 ने कई यादगार यात्राएं पूरी की हैं।
नवंबर 2018: ब्रिटिश पर्यटकों के लिए पलमपुर से बैजनाथ पपरोला तक विशेष चार्टर्ड ट्रेन का सफल संचालन।
वर्ष 2019: स्कूली बच्चों की शिक्षा और जागरूकता के लिए जनवरी व फरवरी माह में विशेष स्टीम ट्रेनें चलाई गईं।
स्टीम लोको ZB-66 की मुख्य तकनीकी विशेषताएँ:
विशेषता/ विवरण
निर्माता एवं वर्ष
डब्ल्यू.जी. बैगनॉल लिमिटेड, यूके (वर्ष 1952)
लंबाई 26 फुट 7 इंच (टेंडर सहित कुल लंबाई: 42 फुट 7 इंच)
वजन एवं क्षमता कुल वजन: 43 टन, ट्रैक्शन क्षमता: 8000 पाउंड,
ईंधन एवं पानी क्षमता 3.5 टन कोयला और 700 गैलन (3000 लीटर) पानी
अधिकतम गति 30 किमी प्रति घंटा (वैक्यूम ब्रेक से सुसज्जित)
उत्तर रेलवे का मुख्य उद्देश्य अपनी इस समृद्ध तकनीकी विरासत को संरक्षित रखना और पर्यटन व शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय रेल के गौरवशाली इतिहास से जोड़ना है।