बीबीएयू में विश्व पर्यावरण दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत लगाए गए पौधे

राहुल यादव, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिनांक 5 जून को पर्यावरण विज्ञान विभाग, बीबीएयू एवं एनबीआरआई – एन्वॉयरमेंटल इन्फार्मेशन, अवेयरनेस, केपेसिटी बिल्डिंग एंड लिवलीहुड प्रोग्राम (NBRI- EIACP) की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ‘इंस्पायर्ड वाइ नेचर : फॉर क्लाइमेट, फॉर अवर फ्यूचर (Inspired by Nature. For Climate. For Our Future)’ विषय पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि एवं वक्ता के तौर पर बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के पूर्व निदेशक डॉ. असद रहमानी मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर कार्यक्रम समन्वयक एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग, बीबीएयू के विभागाध्यक्ष प्रो. वेंकटेश दत्ता, सीएसआईआर – एनबीआरआई के एनवायरमेंट टेक्नोलॉजीज डिवीजन के साइंटिस्ट जी डॉ. पंकज कुमार श्रीवास्तव एवं NBRI- EIACP की डॉ. अंजू पटेल उपस्थित रहीं।

विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में मानव जीवन में पर्यावरण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रकृति हमारे लिए माता के समान है, इसलिए इसके अस्तित्व को सुरक्षित बनाए रखना हम सभी का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अंधाधुंध विकास और उपभोग की प्रवृत्ति के कारण पर्यावरण लगातार उपेक्षित हो रहा है। साथ ही अनेक वन्य प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर पहुँच चुकी हैं और प्राकृतिक संसाधनों का तीव्र क्षरण चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने बताया कि हमें ऐसी जीवनशैली और विकास मॉडल अपनाने होंगे जिनमें प्राकृतिक संसाधनों का न्यूनतम उपयोग हो तथा उनके माध्यम से अधिकतम लोगों को लाभ पहुँचाया जा सके। प्रो. मित्तल ने विद्यार्थियों और युवाओं से प्रकृति के अधिक निकट रहने, सादगीपूर्ण जीवन अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक आदतों का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के पूर्व निदेशक डॉ. असद रहमानी ने पक्षी संरक्षण, जैव विविधता और बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य के संदर्भ में गंभीर चिंताएँ व्यक्त की। उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्रों में बढ़ते रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण अनेक पक्षी प्रजातियों की संख्या में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्व में वर्तमान में जीवित लगभग 11,000 पक्षी प्रजातियों में से लगभग 48 प्रतिशत की आबादी में गिरावट देखी जा रही है, जो वैश्विक स्तर पर जैव विविधता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। उन्होंने पक्षियों के आवास (Habitat) के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि आवासों के विखंडन, भूमि उपयोग में परिवर्तन तथा अनियोजित विकास गतिविधियों के कारण अनेक प्रजातियों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है। प्रवासी पक्षियों (Migratory Birds) के जीवनचक्र, उनके हजारों किलोमीटर लंबे प्रवास, प्रजनन स्थलों और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में उनके आवास वितरण (Habitat Distribution) पर प्रकाश डालते हुए डॉ. रहमानी ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय हस्तक्षेप उनके प्राकृतिक व्यवहार को प्रभावित कर रहे हैं।

कार्यक्रम समन्वयक एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग, बीबीएयू के विभागाध्यक्ष प्रो. वेंकटेश दत्ता ने नदी संरक्षण एवं पुनर्जीवन के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता और मानव सभ्यता की आधारशिला हैं। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक एवं सामुदायिक प्रयासों के माध्यम से नदियों का पुनर्जीवन कर उन्हें पुनः स्वच्छ, अविरल और जीवनदायिनी बनाया जा सकता है। इसके लिए जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण, वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट प्रबंधन, प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा तथा जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर उन्होंने बीबीएयू द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न प्रयासों की भी चर्चा की।

सीएसआईआर – एनबीआरआई के एनवायरमेंट टेक्नोलॉजीज डिवीजन के साइंटिस्ट जी डॉ. पंकज कुमार श्रीवास्तव ने सिंगल यूज प्लास्टिक के बढ़ते दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण आज वैश्विक स्तर पर पर्यावरण के समक्ष एक गंभीर चुनौती बन चुका है। उन्होंने विशेष रूप से माइक्रोप्लास्टिक्स के खतरे को रेखांकित करते हुए बताया कि ये सूक्ष्म प्लास्टिक कण जल, मिट्टी, वायु तथा खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मानव शरीर तक पहुँच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक कचरे के प्रभावी प्रबंधन एवं पुनर्चक्रण (Recycling) को बढ़ावा देकर इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

NBRI- EIACP की डॉ. अंजू पटेल ने NBRI-EIACP केंद्र की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह केंद्र ‘पौधे एवं प्रदूषण’ विषय पर कार्य करते हुए पर्यावरणीय जानकारी के प्रसार, जन-जागरूकता, क्षमता निर्माण तथा सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। केंद्र द्वारा पर्यावरण संरक्षण, मिशन LiFE, हरित कौशल विकास, जैव विविधता संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण तथा पर्यावरण शिक्षा से संबंधित विभिन्न कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों और जनभागीदारी आधारित गतिविधियों का नियमित आयोजन किया जाता है।

इस अवसर पर प्रो. वेंकटेश दत्ता के मार्गदर्शन में तैयार ‘स्माॅलर रिवर रिस्टोरेशन गाइडबुक’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यावरण विषयक इंटरैक्टिव समूह-आधारित खेलों, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता एवं पहेली समाधान गतिविधियों का आयोजन किया गया। साथ ही प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण एवं सतत जीवनशैली को अपनाने हेतु मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) की शपथ भी दिलाई गई।

पर्यावरण दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय के बागवानी एवं सौंदर्यीकरण अनुभाग और राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा चिल्ड्रेन पार्क में ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम के तहत वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। यह कार्यक्रम प्रो. इंचार्ज, प्रो. जी. सी. यादव, सलाहकार हार्टिकल्चर अमोद कुमार सिंह एवं उद्यान निरीक्षक डॉ. समीर दीक्षित के दिशानिर्देशन में आयोजित किया गया। अभियान के दौरान विभिन्न प्रकार के लगभग 300 वृक्ष लगाये गये।

समस्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शिक्षक, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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