बाराबंकी में ‘मखाना की वैज्ञानिक खेती’ पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, देसी सब्जी बीज संरक्षण पर भी जोर

राजेश वर्मा, दौलतपुर / बाराबंकी : कृषि विज्ञान केंद्र-II (KVK-II), कटिया, सीतापुर के तत्वावधान में जनपद बाराबंकी के सूरतगंज ब्लॉक स्थित ग्राम दौलतपुर में ‘मखाना की वैज्ञानिक खेती’ के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक खेती के साथ-साथ किसानों को नकदी फसलों और कृषि विविधीकरण से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना था।

नवोन्मेषी किसानों ने की मेजबानी और भागीदारी
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की मेजबानी नवोन्मेषी (Innovative) एवं प्रगतिशील किसान अमरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा उनके फार्म पर की गई। उन्होंने क्षेत्र के किसानों को एकजुट कर इस नई पहल से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के जाने-माने प्रगतिशील किसान मथुरा प्रसाद सिंह ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई और खेती के अपने अनुभव साझा करते हुए अन्य किसानों का उत्साहवर्धन किया।

विशेषज्ञों ने साझा की महत्वपूर्ण वैज्ञानिक व आर्थिक जानकारी
कार्यक्रम में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों ने मखाना उत्पादन और बीज संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर अहम जानकारियां किसानों के सामने रखीं:

मखाना की खेती और देसी बीज संरक्षण: KVK-II, सीतापुर के अध्यक्ष डॉ. दया शंकर श्रीवास्तव ने उपस्थित किसानों को उच्च लाभ वाली फसल के रूप में मखाना की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही, उन्होंने एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय—’देसी सब्जी बीज संरक्षण’ (Indigenous vegetable seed conservation)—पर जोर दिया। डॉ. श्रीवास्तव ने किसानों को देसी बीजों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता, पोषण और पर्यावरण के अनुकूल होने की महत्ता समझाते हुए इनके संरक्षण के फायदों पर विस्तार से चर्चा की।

वैज्ञानिक तकनीक और बाजार: KVK-II के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. शुभम सिंह राठौर ने किसानों को मखाना की वैज्ञानिक और उन्नत खेती के तरीकों की तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने मखाना उत्पादन के अर्थशास्त्र (Economic benefits) और इसके तेजी से बढ़ते बाजार (Market) के बारे में समझाते हुए बताया कि कैसे किसान सही प्रबंधन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर अपनी आमदनी को कई गुना तक बढ़ा सकते हैं।

53 किसानों की रही सक्रिय भागीदारी
इस जागरूकता कार्यक्रम में दौलतपुर और आसपास के गांवों के 53 किसानों ने भाग लिया। किसानों ने मखाना की खेती और देसी बीजों के संरक्षण के प्रति गहरी दिलचस्पी दिखाई और वैज्ञानिकों से सीधा संवाद कर अपनी कृषि संबंधी शंकाओं का समाधान किया। प्रगतिशील किसानों की इस पहल और 53 किसानों की उत्साहपूर्ण भागीदारी से सूरतगंज ब्लॉक में कृषि के क्षेत्र में एक नई और लाभदायक शुरुआत होने की उम्मीद जगी है।

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