यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 : अपर मुख्य सचिव अलोक कुमार ने UPITS 2026 की तैयारियों का लिया जायजा

अशोक यादव, लखनऊ : सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात प्रोत्साहन विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को लोक भवन सचिवालय के सी-ब्लॉक स्थित सभा कक्ष में उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 के चतुर्थ संस्करण की तैयारियों की अद्यतन प्रगति के संबंध में समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में इन्वेस्ट यूपी, कृषि विपणन, विदेश व्यापार तथा यूपीएलसी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में ट्रेड शो की तिथियां 25 से 29 सितम्बर 2026 निर्धारित किए जाने का निर्णय लिया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों एवं विक्रेताओं को पूर्व नियोजन में सुविधा मिल सके और आयोजन की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सके। यह भी तय किया गया कि इस वर्ष का आयोजन पिछले वर्ष के पैमाने पर ही किया जाएगा, लेकिन विभागों को निर्देश दिए गए कि वे पारंपरिक प्रदर्शनी के बजाय अपनी उपलब्धियों को अधिक प्रभावी एवं आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करें।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इस वर्ष ट्रेड शो का प्रमुख फोकस “जनता तक उपलब्धियों का प्रभावी संप्रेषण” होगा। प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे मीडिया, केंद्रीय प्रतिनिधियों एवं विशिष्ट अतिथियों का ध्यान आकर्षित हो सके।

बैठक में स्टॉल आवंटन एवं शुल्क संरचना पर भी निर्णय लिया गया। स्टॉल दरें 7,500 से 8,000 रूपये के बीच निर्धारित की गई हैं। दो तरफ खुले स्टॉल पर 10 प्रतिशत तथा तीन या चार तरफ खुले स्टॉल पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देय होगा। साथ ही, इस बार निजी क्षेत्र एवं छोटे कॉरपोरेट्स को भी पर्याप्त अवसर और दृश्यता प्रदान करने के निर्देश दिए गए, ताकि वे भी इस मंच का लाभ उठा सकें।

युवा उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “सीएम युवा” पवेलियन की सफलता को आगे बढ़ाते हुए डेयरी, उद्योग, मत्स्य एवं खाद्य प्रसंस्करण विभागों को नवाचार आधारित व्यावसायिक विचार प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे विशेष रूप से एनसीआर एवं गौतम बुद्ध नगर क्षेत्र के युवाओं को नए उद्यम स्थापित करने की प्रेरणा मिल सके।

बैठक में एक्सपो मार्ट में विभागों को आवंटित हॉल एवं क्षेत्रफल की जानकारी भी साझा की गई तथा सभी विभागों को अपने-अपने सार्वजनिक उपक्रमों एवं निजी उत्पादकों को अधिकाधिक भागीदारी के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए गए, ताकि यह आयोजन उत्तर प्रदेश का एक सशक्त सोर्सिंग प्लेटफॉर्म बन सके।

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