पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम के चतुर्थ दिवस पर ईंट निर्मित स्तूपों की स्थापत्य परंपरा एवं संरक्षण पर ज्ञानवर्धक व्याख्यान आयोजित

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय द्वारा आयोजित पुरातत्व अभिरुचि पाठ्यक्रम के चतुर्थ दिवस पर डॉ. राजेंद्र यादव, अधीक्षण पुरातत्वविद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, लखनऊ सर्किल, लखनऊ द्वारा Brick Stupa of India and its Conservation Issues with Special Reference to Stupa at Nalasopara, Maharashtra विषय पर सचित्र एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।

अपने व्याख्यान में डॉ. यादव ने भारत में ईंटों से निर्मित स्तूपों की संरचना, बनावट, आकार एवं स्थापत्य विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय बौद्ध स्थापत्य के प्रमुख स्वरूपों-स्तूप, चौत्यगृह एवं स्तंभों-की चर्चा करते हुए उनके धार्मिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्यगत महत्व को रेखांकित किया। साथ ही स्तूपों की विभिन्न श्रेणियों, विशेष रूप से शारीरिक स्तूपों, जिनका निर्माण भगवान बुद्ध के शारीरिक अवशेषों के ऊपर किया जाता था, सहित अन्य प्रकार के स्तूपों की अवधारणा एवं महत्व पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. यादव ने भारत में स्तूप स्थापत्य के क्रमिक विकास की चर्चा करते हुए बताया कि भारतीय स्तूप परंपरा पर मौर्यकालीन स्थापत्य के साथ-साथ इंडो-ग्रीक, इंडो-सिथियन एवं कुषाणकालीन कला एवं स्थापत्य परंपराओं का भी प्रभाव परिलक्षित होता है। विभिन्न सांस्कृतिक एवं कलात्मक परंपराओं के समन्वय ने भारतीय बौद्ध स्थापत्य को समृद्ध एवं विशिष्ट स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने महाराष्ट्र स्थित नालासोपारा के स्तूप के विशेष संदर्भ में ईंट निर्मित प्राचीन स्मारकों के संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों, संरचनात्मक समस्याओं तथा वैज्ञानिक संरक्षण की आवश्यकता पर भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।

इस अवसर पर निदेशक, उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय, श्रीमती रेनू द्विवेदी ने कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. राजेंद्र यादव को पौधा एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका स्वागत एवं सम्मान किया। श्रीमती द्विवेदी ने सभागार में उपस्थित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिवादन करते हुए पाठ्यक्रम में उनकी सक्रिय सहभागिता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। 100 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑफलाइन मोड में तथा 50 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से व्याख्यान में प्रतिभाग कर भारतीय बौद्ध स्थापत्य, ईंट निर्मित स्तूपों की संरचना, उनके ऐतिहासिक विकास एवं संरक्षण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

सचित्र प्रस्तुतीकरण एवं विषय की व्यापक व्याख्या के माध्यम से यह व्याख्यान प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ तथा भारत की समृद्ध पुरातात्त्विक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने में महत्वपूर्ण रहा।

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