किसी भी परिषदीय विद्यालय को बंद नहीं किया, शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर रही सरकार – मंत्री संदीप सिंह

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में परिषदीय विद्यालयों को बंद किए जाने के आरोपों पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार ने किसी भी परिषदीय विद्यालय को बंद करने का निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों के पेयरिंग को लेकर विपक्ष भ्रम फैला रहा है। सरकार ने शिक्षा व्यवस्था और उपलब्ध संसाधनों को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए हैं। निपुण भारत मिशन के तहत कक्षा तीन तक मिले सकारात्मक परिणामों के बाद इसे कक्षा पांच तक विस्तारित किया गया है।मंत्री सिंह ने कहा कि वर्ष 2019 में 25,578 विद्यालय जो एक ही परिसर में संचालित थे उनके प्रशासनिक एकीकरण का निर्णय लिया गया था। कई परिसरों में कक्षा एक से पांच और छह से आठ तक के विद्यालय एक साथ संचालित थे, जबकि कुछ स्थानों पर एक ही परिसर में दो-दो प्राथमिक विद्यालय भी चल रहे थे। प्रत्येक विद्यालय के लिए अलग शिक्षक और संसाधनों की व्यवस्था करनी पड़ती थी। ऐसे विद्यालयों को कक्षा एक से आठ तक कंपोजिट विद्यालय के रूप में संचालित करने का निर्णय संसाधनों के बेहतर उपयोग और बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया।बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि 50 से कम छात्र संख्या और एक किलोमीटर की परिधि से जुड़े जिन विद्यालयों के संबंध में पेयरिंग का निर्णय लिया गया, उनका यू-डायस कोड समाप्त नहीं किया गया है। वहां बाल वाटिकाएं संचालित की जा रही हैं। प्रदेश में वर्तमान में 71,877 बाल वाटिकाएं संचालित हैं और इनके लिए नया पाठ्यक्रम भी तैयार किया गया है। प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए 19,484 ईसीसीई एजुकेटर्स की नियुक्ति की गई है।मंत्री सिंह ने सदन में कहा कि वर्ष 2017 से पहले बड़ी संख्या में विद्यालय मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे थे। सरकार ने आपरेशन कायाकल्प के माध्यम से विद्यालयों की आधारभूत संरचना में व्यापक सुधार किया। विद्यालयों में निर्धारित 19 मानकों पर वर्ष 2017 में प्रगति करीब 36 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 96 प्रतिशत हो गई है। स्मार्ट कक्षाओं के माध्यम से डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया गया है। शिक्षकों से जुड़े कार्यों को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए मानव संपदा पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है।मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि सरकार के प्रयासों से परिषदीय शिक्षा के प्रति अभिभावकों का भरोसा बढ़ा है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 73.94 लाख बालिकाओं समेत कुल 1 करोड़ 43 लाख 34 हजार विद्यार्थी नामांकित हैं। बच्चों को समय से पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। यूनिफार्म समेत निर्धारित सामग्री के लिए डीबीटी के माध्यम से प्रति विद्यार्थी 1,200 रुपये सीधे अभिभावकों के खाते में उपलब्ध कराए जा रहे हैं।बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के हित में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये और अनुदेशकों का मानदेय नौ हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये किया गया है। इसके साथ ही शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे 12 लाख 28 हजार 587 लोग लाभान्वित हो रहे हैं।मंत्री सिंह ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता मजबूत करने के लिए 11,508 शिक्षकों की नियुक्ति का अधियाचन भेजा जा चुका है। सरकार श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय संचालित कर रही है। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में दो-दो सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं। संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विद्यालय बंद करना नहीं, बल्कि संसाधनों को मजबूत कर गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य उपलब्ध कराना है।

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