
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : हृदय की इमरजेंसी जैसे कार्डियक अरेस्ट, सड़क दुर्घटना, डूबने अथवा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में पहले कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि उस समय उपस्थित व्यक्ति को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) एवं बेसिक लाइफ़ सपोर्ट (BLS) का प्रशिक्षण प्राप्त हो, तो अनेक बहुमूल्य जीवन बचाए जा सकते हैं। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी और नागरिक को इस जीवनरक्षक कौशल का प्रशिक्षण दिया जाना समय की आवश्यकता है। यह विचार डॉ. संजय सिंह, कुलपति, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने व्यक्त किए।
वे मुख्य फार्मासिस्ट, बेसिक लाइफ़ सपोर्ट प्रशिक्षक एवं स्वास्थ्य शिक्षाविद सुनील कुमार यादव द्वारा लिखित पुस्तक “साथी हाथ बढ़ाना – Basic Life Support (BLS): Emergency Response and Life-Saving Skills” प्राप्त करने के उपरांत अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
कुलपति डॉ. संजय सिंह ने पुस्तक का अवलोकन करते हुए कहा कि यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि समाज को जीवनरक्षक कौशल से सशक्त बनाने का अभियान है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को केवल अकादमिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवनोपयोगी कौशल भी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को चरणबद्ध रूप से सीपीआर एवं बेसिक लाइफ़ सपोर्ट प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा, जिससे वे आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी प्रथम प्रतिक्रिया (First Responder) देने में सक्षम बन सकें।
पुस्तक के लेखक सुनील कुमार यादव ने कुलपति का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लाखों लोग कार्डियक अरेस्ट, दुर्घटनाओं एवं अन्य आपातकालीन स्थितियों का सामना करते हैं, जिनमें समय पर प्राथमिक जीवनरक्षक सहायता मिलने से अनेक जीवन बचाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि “साथी हाथ बढ़ाना” का उद्देश्य सीपीआर एवं बेसिक लाइफ़ सपोर्ट जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को सरल भाषा में आमजन, विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों तक पहुँचाना है, ताकि प्रत्येक नागरिक आवश्यकता पड़ने पर किसी की जान बचाने में सक्षम हो सके।
उल्लेखनीय है कि सुनील कुमार यादव वर्तमान में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) चिकित्सालय, लखनऊ में मुख्य फार्मासिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। वे राज्य स्तरीय Basic Life Support (BLS) Trainer, अतिथि संकाय सदस्य तथा स्वास्थ्य प्रशिक्षण विशेषज्ञ हैं और अब तक हजारों चिकित्सकों, फार्मासिस्टों, नर्सिंग अधिकारियों, लैब तकनीशियनों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ जनसामान्य को जीवनरक्षक प्रशिक्षण प्रदान कर चुके हैं।
उनकी पुस्तक “साथी हाथ बढ़ाना” का हाल ही में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा जनभवन में विमोचन किया गया, जिसके बाद यह पुस्तक विभिन्न विश्वविद्यालयों, चिकित्सा संस्थानों एवं प्रशिक्षण केंद्रों में सराहना प्राप्त कर रही है।
डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय देश का एक अग्रणी समावेशी विश्वविद्यालय है, जो दिव्यांगजन शिक्षा, पुनर्वास, अनुसंधान, कौशल विकास एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। कुलपति डॉ. संजय सिंह के नेतृत्व में विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास और समाजोपयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रमों को निरंतर बढ़ावा दे रहा है।
इस अवसर पर पुस्तक के प्रकाशक अक्षय जैन भी उपस्थित रहे।
