‘जलवायु के लिए अभी कार्यवाही’ एवं ‘प्रकृति से प्रेरणा : जलवायु और हमारे सुरक्षित भविष्य के लिए कदम’ संगोष्ठी आयोजित

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित एवं कौशल विकास व उद्यमशीलता मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित जन शिक्षण संस्थान चित्रकूट तथा तुलसी कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां के संयुक्त तत्वावधान में करौहां ग्राम पंचायत में विश्व पर्यावरण दिवस एवं खेत बचाओ अभियान कार्यक्रम का आयोजन जलवायु के लिए अभी कार्यवाही थीम पर किया गया। जिसमें राजकुमार जी उप निदेशक कृषि, राजेन्द्र सिंह नेगी प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां, अनिल कुमार सिंह निदेशक जन शिक्षण संस्थान, डॉ कमलाशंकर शुक्ला मृदा एवम मत्स्य वैज्ञानिक, रतन जी जिला विकास प्रबंधक नाबार्ड, डॉ उत्तम त्रिपाठी प्रसार वैज्ञानिक के द्वारा माल्यार्पण एवं दीपप्रज्वलन के साथ किया गया।

डॉ राजेन्द्र सिंह नेगी ने अपने उदबोधन में कहा कि प्राकृतिक असंतुलन (पर्यावरण असंतुलन) से पारिस्थितिक तंत्र के प्रमुख घटकों जल, वायु, मिट्टी, और जलवायु के बीच का प्राकृतिक सामंजस्य बिगड़ रहा है जिसका मुख्य कारण अनियंत्रित वनों की कटाई, अंधाधुंध प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं। इसका सीधा और गहरा असर कृषि और मानव जीवन पर पड़ रहा है।

डॉ कमलाशंकर शुक्ला मृदा एवं मत्स्य वैज्ञानिक ने कहा कि प्राकृतिक असंतुलन से मानव अछूता नही है इससे मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, वहीं आजीविका और अर्थव्यवस्था की मार पड़ रही है कृषि पर निर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान और पलायन का दंश झेलना पड़ता है।

राजकुमार कृषि उप निदेशक ने कहा कि पेयजल की समस्या आज विकराल हो रही है क्योंकि भू-जल स्तर के लगातार नीचे जाने से शुद्ध पेयजल की भारी किल्लत हो रही है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से तापमान वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं के कारण कुपोषण, विस्थापन और मानसिक तनाव की समस्याएँ बढ़ रही हैं। प्राकृतिक असंतुलन को रोकने के लिए सतत कृषि और प्राकृतिक खेती को अपनाना बेहद जरूरी है।

अनिल सिंह निदेशक ने पर्यावरण दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में जन शिक्षण संस्थान द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न रोजगार परख कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रदान कर स्वरोजगारी एवं स्वावलम्बी बनने की अपील की साथ ही कहा कि विश्व पर्यावरण पर कहा कि लोगों को जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 5 जून को प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।

डॉ उत्तम त्रिपाठी ने समाज की सहभागिता एवं सामूहिक प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

रतन जी जिला विकास प्रबंधक नाबार्ड ने उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग, मृदा परीक्षण के महत्व तथा उन्होंने किसानों को उर्वरकों एवं डीजल जैसे संसाधनों के संतुलित उपयोग के साथ-साथ जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में बनारसीलाल पाण्डेय, प्रभाकर मिश्रा, अभय राज, राजकिशोर द्विवेदी एवं समस्त कार्यकर्ताओ ने अपना अमूल्य योगदान प्रदान किया। संकेकित रूप में अतिथियों द्वारा 5 वृक्षों का रोपण भी किया गया, इस कार्यक्रम में लगभग 57 महिलाएं एवं 89 पुरुषों ने प्रतिभाग किया।

वहीं दूसरी ओर एक अन्य कार्यक्रम में दीनदयाल शोध संस्थान के आरोग्यधाम परिसर स्थित सभागार में ‘प्रकृति से प्रेरणा: जलवायु और हमारे सुरक्षित भविष्य के लिए कदम’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मेरी जीवन शैली मेरा पर्यावरण, रोजमर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव से पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन कल नहीं आज कदम, बढ़ते तापमान के खिलाफ हमारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी, प्रकृति से प्रेरणा: जलवायु और हमारे सुरक्षित भविष्य के लिए कदम पर्यावरण एवं स्वास्थ्य बदलते मौसम और हमारे स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव, पंचमहाभूत और आरोग्य प्रकृति के पांच तत्वों का संरक्षण एवं संवर्धन और मानव स्वास्थ्य विषय पर आयोजित की गई। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डॉ रामनारायण त्रिपाठी संचालक गायत्री शक्तिपीठ एवं डॉ शशिकांत त्रिपाठी महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय, अपराजित शुक्ला सचिव दीनदयाल शोध संस्थान मुख्य रूप में उपस्थित रहे।

मुख्यवक्ता डॉ शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए सही दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है। पर्यावरण संरक्षण के अभाव में जीवन शून्य है हम सभी अपने बच्चों, बुजुर्गों के जन्मदिवस एवं वैवाहिक वर्षगाँठ में कम से कम एक वृक्ष अवश्य रोपित कर उनका संरक्षण करें, उनको पुष्पित व पल्लवित करें। यथासंभव प्लास्टिक के उपयोग को कम से कम करने का प्रयास करें एवं दूसरों को भी जागरूक करें।

अध्यक्षीय उद्बोधन करते हुए डॉ रामनारायण त्रिपाठी ने कहा कि हमारे वेद, पुराण भी हमे प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सदैव प्रेरित करते हैं। महर्षि वाल्मीकि ने भी स्पस्ट किया कि बिना प्रकृति संतुलन के कुछ भी संरक्षित नहीं रह सकता क्योंकि इस सम्पूर्ण जगत के अस्तित्व का आधार प्रकृति है। कार्यक्रम का संचालन आयुर्वेद सदन के प्रभारी डॉ मनोज त्रिपाठी द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में महाप्रबंधक डॉ अनिल जायसवाल, राव प्रबल श्रीवास्तव, केके बाजपेई, मनोज सैनी, मदन तिवारी, जितेंद्र श्रीवास्तव सहित सभी प्रकल्प प्रमुख एवं कार्यकर्ता व नगर के प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।

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