चित्रकूटधाम पधारे परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ने डीआरआई के प्रकल्पों का किया भ्रमण

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : यथार्थ गीता के प्रणेता परमपूज्य सदगुरुदेव परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ने अपने चित्रकूट प्रवास के दूसरे दिन दीनदयाल शोध संस्थान के आरोग्यधाम परिसर में संस्थान के कार्यकर्ताओं एवं शिष्यों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि गीता का ज्ञान केवल अर्जुन के लिए नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवमात्र के लिए भी है, जो सांसारिक दुखों से मुक्ति और आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है। यूँ तो जीवन में सोचने को तो लाख बातें हैं और न सोचे तो कुछ नही, उनमें पूरी वही होगी जिसे ईश्वर चाहेंगे। गीता को धर्मशास्त्र घोषित किया है तो गीता ही धर्मशास्त्र है सदैव था, आज है और भविष्य में भी रहेगा।

ब्रह्मानन्दं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिं, द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं तत्त्वमस्यादिलक्ष्यम्।
एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधीसाक्षिभूतं,भावातीतं त्रिगुणरहितं सद्गुरुं तं नमामि॥
जीवन मे सद्गुरु के बिना कल्याण नही हो सकता इसलिए उसकी पहचान करो फिर अपनाओ कपड़े रंगने से आप भवकूप से पार नही हो सकते हो अर्थात अपनी क्षमता बढाओ।

स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ने कहा कि दो ढाई अक्षर का छोटा सा नाम ओऊम कहो अथवा राम, किसी भाषा में कह सकते हो। क्योंकि परमात्मा राम ने कहा है कि कोई कुसंस्कार ऐसा नही जो प्रभु चरणों एवं उनकी शरण में जाने से न कट जाए। अर्जुन ने भगवान कृष्ण से पूंछा था कि भगवान कहाँ प्राप्त होंगे भगवान ने उत्तर दिया कि किसी तत्वदर्शी महापुरुष के पास निष्कपट भाव से सेवा करके इसे प्राप्त कर सकते हो क्योंकि वे तत्व का उपदेश करेंगे प्रत्यक्ष साक्षात्कार के साथ मिलने वाली जानकारी का नाम केवल ज्ञान है।

भारत जब जब अयोग्य हाथों में गया तब तब भारत की आध्यत्मिकता खटाई में पड़ी है। आज देश में जो करोड़ों मुसलमान हैं वो एक भी मुसलमान नही हैं, सनातनी हिन्दू हैं हमारे सगे भाई हैं। आज वे भूल गए हैं कि उनका घराना यह है। जिस दिन से गीता पा जाओगे उनको भी दे दोगे वे अपना घराना पा जाएंगे। वे जान जाएंगे कि हम पतित कभी नही हुए आप भी जान जाओगे कि ये पतित होने का तरीका नही है। प्रभु में श्रद्धा कदाचित कम हो गई है अर्थात हम वासनाओं में कहीं भटक गए हैं। अविद्या माया बड़ी दुष्ट तथा अत्यंत दुखदायिनी है इस अविद्या माया के कारण ही जीव भव बंधन में पड़ता है। अतः सभी अविद्या का नाश कर सत्य एवं अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानो तथा विश्व कल्याण में युत हो जाओ।

इस अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन द्वारा संस्थान द्वारा संचालित की जा रही विभिन्न समाजोपयोगी गतिविधियों एवं कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई। स्वामी जी को दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न प्रकल्पों का भ्रमण कराया गया, जिसमें गुरुकुल संकुल, राम दर्शन, उद्यमिता विद्यापीठ, गौवंश विकास अनुसंधान केन्द्र, दीनदयाल परिसर प्रमुख रहे। भ्रमण के ही अन्तर्गत रामनाथ आश्रमशाला में 24 अप्रैल से 10 मई तक संचालित हो रहे व्यक्तित्व विकास शिविर का भी अवलोकन कराया गया। इस दौरान स्वामी जी शिविर में प्रतिभागी ग्रामीण बच्चों से भी रूबरू हुए और और वहाँ की दिनचर्या व विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षण ले रहे बच्चों की गतिविधियों को भी समझा।

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