
विकसित भारत के स्वपन को साकार करने की ओर विश्वविद्यालय की अभिनव पहल
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार 25 फरवरी को हॉबी क्लब का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल द्वारा की गयी। इसके अतिरिक्त मंच पर हॉबी क्लब एवं एनईपी – 2020 क्रियान्वयन समिति, बीबीएयू की अध्यक्ष प्रो. संगीता सक्सेना उपस्थित रहीं। हॉबी क्लब का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता और जुनून को विकसित करना है। यह क्लब विद्यार्थियों को अपनी रुचियों की पहचान करने, उन्हें निखारने तथा नई विधाओं को सीखने का सृजनात्मक मंच प्रदान करेगा, जिससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नवाचार की भावना एवं व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल द्वारा फीता काटकर विधिवत रूप से किया गया। साथ ही बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की गयी। विश्वविद्यालय कुलगीत गायन के पश्चात आयोजन समिति की ओर से कुलपति जी को पुष्पगुच्छ भेंट करके उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। सर्वप्रथम प्रो. संगीता सक्सेना ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया एवं सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया। मंच संचालन का कार्य डॉ. मनोज डडवाल द्वारा किया गया।
बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास एवं उनकी रचनात्मक क्षमताओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कुल 13 हॉबी क्लब प्रारंभ किए गए हैं। इन क्लबों में म्यूजिक, अर्बन गार्डनिंग, पेंटिंग, फोटोग्राफी, डिजिटल लिटरेसी एवं कंपिटेंसी, योग थेरेपी, क्रिएटिव राइटिंग, कम्युनिटी सर्विस, मेंटल हेल्थ एंड वेलबीइंग, नेचुरोपैथी वेलनेस, बेकर्स क्राफ्ट (नो ओवन नो प्रॉब्लम), डिजास्टर रिस्क रिडक्शन तथा स्पोर्ट्स (एनी) जैसे क्लब्स को शामिल किया गया है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल क्लासरूम शिक्षा तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ते हुए समग्र रूप से विकसित करना है। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु विश्वविद्यालय में हॉबी क्लब की शुरुआत की गई है, जिससे छात्र-छात्राएँ अपनी रुचियों को प्रोत्साहित कर सकें और अपने पैशन को प्रोफेशन में रूपांतरित करने का प्रयास करें। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी प्रतिभा को निखारते हुए समाज की समस्याओं के साथ जुड़ें तथा उनके समाधान में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। ‘पंचकोश’ के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समग्र विकास वही है जो व्यक्ति को परिवार, समाज, देश और राष्ट्र से जोड़कर उनके उत्थान में योगदान देने के लिए प्रेरित करे। साथ ही कुलगीत की पंक्तियों का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय को ‘ज्ञान का संसद’ बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी-अपनी रुचि के अनुसार हॉबी क्लब से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि इससे तनाव जैसी समस्याओं में कमी आएगी, मानसिक संतोष प्राप्त होगा तथा सहानुभूति के साथ समाज से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
हॉबी क्लब, बीबीएयू एवं एनईपी – 2020 क्रियान्वयन समिति की अध्यक्ष प्रो. संगीता सक्सेना ने अपने विचार रखते हुए कहा कि एनईपी 2020 के माध्यम से विश्वविद्यालयी शिक्षा में बहुविषयक पाठ्यक्रमों, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट प्रणाली तथा लचीली एवं कौशल-आधारित शिक्षण व्यवस्था को प्रोत्साहित किया गया है, ताकि विद्यार्थियों का समग्र और व्यावहारिक विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु विश्वविद्यालय में हॉबी क्लब की शुरुआत की गई है, जिससे विद्यार्थियों में नवाचार, रचनात्मकता, कौशल, उद्यमिता और जीवनोपयोगी क्षमताओं का विकास हो सके और वे पढ़ाई के साथ-साथ आम के साधन विकसित कर सकें। इसके अतिरिक्त हॉबी क्लब विद्यार्थियों को अपनी हॉबी को कौशल में और कौशल को करियर में परिवर्तित करने का मंच प्रदान करेगा !
इस अवसर पर कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने हॉबी क्लब के अंतर्गत स्थापित विभिन्न क्लबों से जुड़े समन्वयकों एवं विद्यार्थियों से संवाद किया और उनकी गतिविधियों की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। इस दौरान विद्यार्थियों की प्रतिभाओं एवं सृजनात्मक कार्यों को प्रदर्शित करती हुई एक विशेष फोटो गैलरी भी आयोजित की गई, जिसका कुलपति द्वारा अवलोकन एवं निरीक्षण किया गया। उन्होंने सभी क्लबों के समन्वयकों को विश्वविद्यालय कैलेंडर भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके प्रयासों की सराहना करते हुए उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।