राम मंदिर चंदा चोरी- आस्था के नाम पर राजनीति, चढ़ावे के नाम पर लूट – दीपेन्द्र सिंह हुड्डा

अशोक यादव, लखनऊ : उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में शुक्रवार अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी कार्यसमिति के सदस्य एवं सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ने प्रेसवार्ता को सम्बोधित किया। प्रेसवार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष-पूर्व मंत्री अजय राय मौजूद रहे। दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ने कहा कि तीन बड़े सवाल हैं-

  1. जब ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ, तो इस घोटाले की जवाबदेही कौन लेगा?
  2. अगर सब कुछ ठीक था, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए?
  3. अगर कुछ गलत नहीं हुआ, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है?

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं। देश के कोने-कोने से गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई, अपने गहने, अपनी बचत और अपनी श्रद्धा लेकर राम मंदिर निर्माण के लिए आगे आए। भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के संगठनों ने लगभग तीन दशकों तक भगवान राम के नाम पर राजनीति की, देश के गरीब व मध्यम वर्ग से राम के नाम पर चंदा एकत्र किया और इसी आंदोलन के आधार पर सत्ता प्राप्त की।

आज वही करोड़ों रामभक्त यह पूछने को मजबूर हैं कि भगवान राम के नाम पर जुटाया गया चंदा और चढ़ाया आखिर किसके संरक्षण में लूटा गया?

यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं के साथ किया गया घोर विश्वासघात है।

अब तक सामने आए तथ्य अत्यंत गंभीर हैं-

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं। यह स्वयं इस बात का संकेत है कि मामला सामान्य प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले का है।

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने स्वयं सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं, जबकि ट्रस्ट की वित्तीय निगरानी, पारदर्शिता और संपत्तियों की सुरक्षा की सर्वाेच्च जिम्मेदारी उन्हीं की थी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रस्ट के विशिष्ट आमंत्रित सदस्य गोपाल राव (गोपाल नगरकोटे) को हटाए जाने और उनकी स्थिति को लेकर भी गंभीर भ्रम और विरोधाभास सामने आए हैं।

आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी *कृष्णमोहन * को ट्रस्ट का नया महासचिव बनाया गया है, जबकि उन पर पूरे प्रकरण को दबाने और लीपापोती करने के आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए जा चुके हैं।

यह जग जाहिर है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और शीर्ष नियुक्तियों में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की सक्रिय भूमिका रही है। ऐसे में केंद्र सरकार अपनी जवाबदेही से स्वयं को अलग नहीं कर सकती।

एसआईटी अब राम मंदिर के बड़े आयोजनों के खर्चों की भी जांच कर रही है।

22 जनवरी 2024 की प्राण-प्रतिष्ठा पर लगभग ₹113 करोड़ खर्च किए गए, जिसमें लगभग 8,000 अतिथि शामिल हुए।

25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण कार्यक्रम पर लगभग ₹10.12 करोड़ खर्च किए गए।

फर्जी रसीदों, नकद चढ़ावे, लेखा-जोखा और कथित हेराफेरी के अनेक आरोप सामने आए हैं।

छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की जवाबदेही अब तक तय नहीं हुई है।

यही नहीं, भाजपा-आरएसएस ने न प्रभु श्री राम के चंदे को छोड़ा और ना ही अब उत्तराखंड के श्री बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े हालिया दान घोटाले ने भी यह प्रश्न खड़ा किया है।

कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस इस सच्चाई पर पर्दा नहीं डाल सकती कि सीसीटीवी निगरानी, बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर यह कथित घोटाला संभव नहीं हो सकता। टुकड़ों-टुकड़ों में इस्तीफे, छोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारी और सीमित कार्रवाई केवल लीपापोती का प्रयास प्रतीत होते हैं, ताकि बड़ी मछलियों तक आंच न पहुंचे।

देश जानना चाहता है –

  1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे प्रकरण पर मौन क्यों हैं?
  2. क्या चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोविंद देव गिरी, गोपाल राव और ट्रस्ट के अन्य शीर्ष पदाधिकारी इस पूरे प्रकरण में अपनी जवाबदेही से बच सकते हैं?
  3. जब पूरा ट्रस्ट कटघरे में है, तो केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों?
  4. क्या डबल इंजिन सरकार दोषियों को बचा रही है?
  5. क्या केंद्र सरकार सच्चाई सामने आने से डर रही है?
  6. अगर सब कुछ पारदर्शी था, तो इस्तीफे क्यों हुए?
  7. गिरफ्तारियां शीर्ष स्तर पर क्यों नहीं हुईं?

कांग्रेस पार्टी की मांगें –

  1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सामने जवाब दें : प्रधानमंत्री स्पष्ट करें कि ट्रस्ट के गठन, शीर्ष नियुक्तियों और प्रशासनिक निगरानी में उनकी सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय की क्या भूमिका रही है और इतने गंभीर आरोपों के बाद वे अब तक मौन क्यों हैं।
  2. तत्काल गिरफ्तारी : चंपत राय, अनिल मिश्रा और इस पूरे घोटाले में शामिल सभी प्रभावशाली व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की जाए।
  1. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच : पूरे प्रकरण की जांच सर्वाेच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस कथित लूट के पीछे कौन लोग हैं औन किसके संरक्षण में यह सब वर्षों तक चलता रहा।
  1. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए : वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर धर्माचार्यों, प्रतिष्ठित नागरिकों, प्रशासनिक विशेषज्ञों और स्वतंत्र सदस्यों के साथ एक नया, पारदर्शी और जवाबदेह ट्रस्ट गठित किया जाए।
  1. चढ़ावे और चंदे का पूर्ण फॉरेंसिक ऑडिट : राम मंदिर के लिए प्राप्त समस्त चंदे, चढ़ावे, भूमि खरीद, आयोजनों और व्ययों का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

भगवान राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं। वे करोड़ों भारतीयों की आस्था हैं। भगवान राम के नाम पर जुटाए गए धन की कथित लूट और उस पर पर्दा डालने की हर कोशिश देश की धार्मिक चेतना का अपमान है।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की आस्था पर डाका डालने वालों को बचाने की नहीं, बेनकाब करने और कानून के कठघरे में खड़ा करने की आवश्यकता है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय -पूर्व मंत्री ने प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन करने के लिए हम गये थे कांग्रेस के सांसद, विधायक और कई नेता दर्शन करने के लिए अयोध्या गये थे किन्तु हमें हाउस अरेस्ट कर लिया गया। दर्शन करने नहीं जाने दे रहे थे, काफी जद्दोजहद के बाद पुलिस के साथ हमें दर्शन करने दिया गया। वहीं दूसरे दल के लोगों को वीआईपी व्यवस्था के साथ दर्शन कराया गया। भाजपा और आरएसएस के लोगों ने चंदा चोरी और चढ़ावा चोरी किया और उसे छिपाने का प्रयास कर रहे हैं कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जा रही है कुछ चन्द छोटे कर्मचारियों को जेल भेजकर बड़ों को बचाने का प्रयास भाजपा की सरकार कर रही है। आखिर जिम्मेदार ट्रस्ट के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर क्येां नहीं दर्ज कराया जा रहा है।

प्रेसवार्ता का संचालन प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ0 उमा शंकर पाण्डेय ने किया।

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