डीएफसीसीआईएल : चीकू की पहली रैक की हुई लोडिंग- किसानों को मिला बाजार, दिल्ली-एनसीआर को ताजे फल

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली / अमलसाड़, गुजरात : अब गुजरात के छोटे किसान भी अपने खेतों से सीधे देश की राजधानी के बाजारों तक पहुंच बना रहे हैं। रविवार 22 मार्च को अमलसाड़ से चीकू की पहली डीएफसीसीआईएल रैक लोडिंग ने किसानों के लिए नई आर्थिक संभावनाएँ खोली हैं और दिल्ली-एनसीआर के उपभोक्ताओं को ताजा फल तेजी से उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार किया है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) की यह पहल कृषि परिवहन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है। इसके तहत अमलसाड़ विभाग विविध कार्यकारी सहकारी खेड़ूत मंडली लिमिटेड ने न्यू अंचेली (एसीएलएन) स्टेशन से चीकू की पहली रेल खेप दिल्ली के आदर्श नगर मंडी के लिए रवाना की।

डीएफसीसीआईएल की मुंबई इकाई के अंतर्गत संचालित इस रैक में कुल 15 डिब्बों (वीपी) में ताजा चीकू लोड किया गया।लगभग ₹ 75,000 के माल-भाड़ा मूल्य पर पहुँचाई गई यह खेप, थोक कृषि-वस्तुओं के परिवहन के लिए रेल परिवहन की लागत-दक्षता, पूर्वानुमान-योग्यता और विस्तार-क्षमता को उजागर करती है। सड़क-आधारित पारंपरिक लॉजिस्टिक्स के विपरीत, जिसमें ज़्यादा ईंधन की खपत, टोल शुल्क और भीड़भाड़ के कारण देरी होती है, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेल परिवहन के माध्यम से तेज़ और निर्बाध आवाजाही को संभव बनाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि जल्दी खराब होने वाला सामान कम से कम नुकसान के साथ बेहतर स्थिति में समय पर बाज़ारों तक पहुँचे।

अब डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के माध्यम से ये चुनौतियाँ कम होंगी। निर्बाध गति वाली मालगाड़ियाँ कम समय में उत्पाद को बाजार तक पहुँचाएँगी, जिससे फलों की ताजगी बनी रहेगी। साथ ही, ट्रकों की संख्या कम होने से सड़कों पर दबाव और प्रदूषण में कमी आएगी। यह पहल सरकार की ‘गति शक्ति’ योजना के अनुरूप है, जो एकीकृत और टिकाऊ परिवहन तंत्र विकसित करने पर केंद्रित है।यह मॉडल ‘खेत से बाजार’ संपर्क को मजबूत करेगा। आने वाले समय में आम सहित अन्य नाशवान फलों की भी रेल से ढुलाई संभव होगी।

अमलसाड़ से चीकू की यह पहली रैक लोडिंग किसानों व उपभोक्ताओं के बीच कुशल, तेज और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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