बीबीएयू में ‘शैक्षणिक और अनुसंधान नैतिकता संबंधी दिशा निर्देश’ पर जागरूकता कार्यशाला एवं संवाद सत्र आयोजित

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार 27 मई को ‘शैक्षणिक और अनुसंधान नैतिकता संबंधी दिशानिर्देश (Academic and Research Integrity Guidelines) विषय पर जागरूकता कार्यशाला एवं संवाद सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इसके अतिरिक्त मंच पर डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, आईक्यूएसी निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा, एनआईआरएफ समिति के अध्यक्ष प्रो. कुशेंद्र मिश्रा और रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल के निदेशक प्रो. शिशिर कुमार उपस्थित रहे।

विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि शोध कार्यों को अधिक गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं नैतिक बनाया जाए। उन्होंने सभी शिक्षकों से सुझाव आमंत्रित किए, ताकि शैक्षणिक एवं अनुसंधान सत्यनिष्ठा (Academic and Research Integrity) से संबंधित दिशानिर्देशों का प्रभावी रूप से पालन सुनिश्चित किया जा सके। प्रो. मित्तल ने कहा कि इन दिशानिर्देशों का मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देना, नैतिक शोध संस्कृति को सुदृढ़ करना तथा विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा एवं विश्वसनीयता को बनाए रखना है। साथ ही प्रो. मित्तल ने शोध कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सकारात्मक एवं जिम्मेदार उपयोग पर विशेष जोर दिया।

डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू ने अपने वक्तव्य में कहा कि शोध कार्य के दौरान केवल शोध पत्रों की संख्या बढ़ाने के बजाय उनकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार प्रकाशन एवं बेहतर लेखकीय मानक (Authorship Standards) ही उत्कृष्ट, विश्वसनीय और प्रभावी शोध की वास्तविक पहचान होते हैं। साथ ही उन्होंने शोधकर्ताओं से नैतिक मूल्यों, पारदर्शिता तथा मौलिकता को बनाए रखते हुए समाजोपयोगी एवं गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान करने का आह्वान किया।

एनआईआरएफ समिति के अध्यक्ष प्रो. कुशेंद्र मिश्रा ने अपने व्याख्यान में शोध पत्रों के रिट्रैक्शन से संबंधित विभिन्न मानदंडों की विस्तार से जानकारी दी तथा बताया कि किन सावधानियों और उपायों को अपनाकर इससे बचा जा सकता है। उन्होंने शोध सत्यनिष्ठा प्रक्रिया (Research Integrity Process) के अंतर्गत ऑपरेशनल फीचर्स, अवेयरनेस एवं आउटरीच पहल, तकनीकी अवसंरचना, अनिवार्य स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल तथा जांच प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विस्तृत चर्चा की। साथ ही उन्होंने शोध कार्य में पारदर्शिता, नैतिकता एवं जिम्मेदारी बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल के निदेशक प्रो. शिशिर कुमार ने रिसर्च मिसकंडक्ट के विभिन्न पहलुओं जैसे फैब्रिकेशन, फॉल्सिफिकेशन, प्लेजरिज्म, फेक पीयर रिव्यू, डेटा मैनिपुलेशन तथा शोध निधि के गलत प्रस्तुतीकरण पर विस्तृत चर्चा की। इसके अतिरिक्त उन्होंने शोध सत्यनिष्ठा एवं नैतिकता को सुदृढ़ बनाने हेतु प्रकाशन नीतियों, डेटा प्रबंधन, मेंटरशिप कार्यक्रम तथा अन्य शोध अखंडता संबंधी नीतियों की भी विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने भी अपने विचार एवं अनुभव साझा किए तथा शोध कार्यों को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण एवं नैतिक बनाने हेतु विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने शैक्षणिक एवं अनुसंधान सत्यनिष्ठा संबंधी दिशानिर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल देते हुए शोध संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यशाला के‌ दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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