विभाग आवंटन में योगी ने टीम गुजरात को दिया कड़ा संदेश – दबदबा था, दबदबा है, दबदबा बना रहेगा…..!

मनोज श्रीवास्तव, लखनऊ : मंत्रिमंडल विस्तार देकर तो योगी ने यही संदेश दिया कि दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा। गृह, पीडब्ल्यूडी, ऊर्जा, सूचना तक बंटने की खबर चली थी। लेकिन योगी ने किसी की नहीं सुनी। बताते हैं कि दल बदल कर आये एक मंत्री जी के समर्थक तो पीडब्ल्यूडी के राज्य मुख्यालय के इर्द-गिर्द होडिंग तक लगा दिये थे। इतने दिनों बाद यूपी के नये मंत्रियों को विभाग आवंटित हुये! बस एक सवाल उठ रहा है कि यदि यही आवंटन होना था तो इतना समय क्यों लगा?

चुनाव के पूर्व किये गये विस्तार के बाद पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह से नेतृत्व को अपेक्षा है कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के दम पर जाट बेल्ट में राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी से ज्यादा लोकप्रिय हो जायें। इनको लेकर मीडिया में पूर्वानुमान लगाया जा रहा था कि भूपेंद्र सिंह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटने बाद लोकनिर्माण विभाग के मंत्री बनेंगे। बहुत सारे लोग यह कह रहे हैं कि यदि जाट वोट पर ठाट करने की योजना थी तो कम से कम कृषि और गन्ना तथा चीनी विभाग का मंत्री तो बनाना ही था। जिससे जाट लैंड खुद को सीधे जुड़ा मान लेता। फिलहाल यह दिल्ली वाले शर्मा जी की बेज्जती है। जिनके हर छोटे-मोटे से लेकर बड़े-बड़े आयोजनों में चौधरी साहब की हाजिरी बगैर नागा लगती रही। इस निर्णय से चौधरी जी को कम और उनके राजनैतिक संरक्षक शर्मा एंड कंपनी की शाख को धक्का पहुंचा है। चुनाव पूर्व उन पर हुआ हमला दल बदल कर आने वाले लोगों के लिये राजनैतिक संकट ला सकता है।

शर्मा जी की कृपा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट पर उन्हें मजबूत करने के लिये कांग्रेस से आकर मंत्री बने डॉ दयाशंकर मिश्र उपाख्य दयालु महाराज का विभाग घटाया गया है। लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र में उनका वोट घटने की कीमत दयालु को अपना विभाग घटा कर देना पड़ा। खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग के वह राज्य मंत्री थे। यह विभाग उनसे लेकर स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री अजीत सिंह पाल को दे दिया गया। कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट से विधायक हैं। भाजपा संगठन में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल से बड़ा कोई पाल समाज का नेता नहीं है। योगी मंत्रिमंडल में इनके कद बढ़ने के बाद प्रयागराज से लेकर मैनपुरी तक पाल वोट बैंक पर भाजपा की पकड़ मजबूत होगी।

सबसे मजे में मनोज पांडे देखे जा रहे हैं। गुजरात में अभिवादन के समय कहा जाता है “केम छू उत्तर में बोलते हैं मजा माछो”। उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी की विधानमंडल दल के मुख्य सचेतक रहते हुये मनोज पांडेय पर राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का आरोप लगा था। उसी आरोप को गलत साबित करने के लिये इन्हें खाद्य रसद विभाग से नवाजा गया है। इसका सबसे तात्कालिक परिणाम रायबरेली जिले की स्थानीय राजनीति में वर्चस्व की जंग में दिखेगा। जहां कांग्रेस से आये दिनेश प्रताप सिंह तमाम भाजपाइयों का अरमान घोंटते हुये विधानपरिषद सदस्य और मंत्री भी बन गये। रायबरेली में मूल भाजपाई हाशिये पर ही है। वह अभी भी मुख्यधारा में रह कर नेतृत्व करने की प्रतीक्षा में ही है। जिनसे वह विपक्ष में लड़ा पार्टी के सत्ता में आने के बाद वही उनकी पार्टी में घुस कर सिरमौर हो गये। अब वह किम कर्त्तव्य विमूढ़ होकर घूम रहे हैं।

सोमेंद्र तोमर राज्य मंत्री से स्वतंत्र प्रभार मंत्री बन गये। इस प्रोन्नति से इनकी कार्यालयी शक्ति तो बढ़ गयी लेकिन जनाधार बढ़ाने में इसका कोई बहुत प्रभाव नहीं पड़ेगा। गूजर समाज में पैठ बढ़ाने के लिये पार्टी पूर्व मंत्री अशोक कटारिया को मंत्री बना कर ले सकती थी। पश्चिम के मंत्रियों को विभाग के नाम पर योगी जी ने जो झुनझुना पकड़ाया से इसके बल पर वह जाट-गुजर का वोट बढ़ा लेंगे यह कहना कठिन है।पिछले दिनों सोमेंद्र तोमर पर खुद का विकास करने के कुछ आरोप लगे थे। कहा जा रहा है कि योगी सरकार और भाजपा नेतृत्व ने उन्हें बेदाग समझा होगा तभी तो प्रोन्नति देकर राज्य मंत्री से स्वतंत्र प्रभार बना दिया।

कृष्णा पासवान को राज्यमंत्री बनाना भाजपा के हित में अधिक है।कृष्णा पासवान वह महिला नेता हैं जो जानती हैं कि “जूते में दम तो कहो कलक्टर हम”। संघर्षों से निकली महिला हैं। दलित पासी समाज से आने वाली कृष्णा पासवान चौथी बार की विधायक हैं। उनको राज्य मंत्री और दो बार के विधायक सोमेंद्र तोमर को राज्य मंत्री से तरक्की कर स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है।

राज्य मंत्री बने एडवोकेट कैलाश राजपूत कन्नौज के तिर्वा विधानसभा से चौथी बार विधायक हैं। पेशे से वकील और व्यवहार में मृदु होने के कारण वह समाजवादी पार्टी के गढ़ में भी जीत-हार की परिधि से बड़ी लाइन के नेता हैं। इनके मंत्री बनने के बाद समाजवादी पार्टी को पाल और लोध दो बड़े परंपरागत प्रतिद्वंद्वी उभरते दिखने लगे। अब समाजवादी पार्टी आंख बंद करके किसी यादव को लड़ाने की हिम्मत नहीं जुटा पायेगी। सपा ने गलती से भी 2027 के चुनाव में यादव प्रत्याशी उतार दिया तो रण में उतरने के पहले पीडीए का रथ पंचर हो जायेगा।

अलीगढ़ जिले की खैर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह दिलेर दलित समुदाय से आते हैं। भाजपा के खानदानी राजनीतिक परिवार से हैं। उनके दादा किशन लाल दिलेर हाथरस लोकसभा सीट से चार बार के सांसद और 6 बार विधायक रहे। उनके पिता स्व रवीर सिंह दिलेर हाथरस सीट से बीजेपी के सांसद रहे और एक बार विधायक भी बने। सुरेंद्र दिलेर जनसंघ और खाटी भाजपाई राजनीतिक परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं। वह हाथरस लोकसभा सीट से अपने पिता के लिए बूथ मैनेजमेंट की जिम्मेदारी संभालते रहे। पश्चिमी यूपी के दलित-मुस्लिम समीकरण को तोड़ने के लिये तथा चंद्रशेखर रावण का प्रभाव घटाने के लिये योगी आदित्यनाथ ने इन्हें मंत्री बनाया है। 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में योगी ने इन्हें अलीगढ़-हाथरस क्षेत्र में दलित और स्थानीय समर्थन को अपने पक्ष में करने की कोशिश है। पश्चिम यूपी में दलित वोट बैंक पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। सुरेंद्र सिंह दिलेर ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। उनका परिवार कृषि और राजनीति में सक्रिय रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्षेत्र से आने वाले हंसराज विश्वकर्मा भाजपा के जिले यूनिट का अध्यक्ष रह चुके हैं। अति पिछड़े व वाराणसी क्षेत्र का होने के कारण इन्हें विधानपरिषद का सदस्य बना दिया गया था। विश्वकर्मा अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा वाराणसी से चौथे मंत्री हो गये। इससे पहले अनिल राजभर कैबिनेट, रविन्द्र जायसवाल व डॉ दयाशंकर मिश्र “दयालु” स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री थे, हाल ही में गाजीपुर में विश्वकर्मा समाज की लड़की के साथ हुई दुर्घटना में भाजपा की बहुत किरकिरी हुई थी। उसको लेकर समाजवादी पार्टी ने लगातार राजनैतिक विरोध जताया है, लेकिन वह अभी तक अपने मंसूबे में सफल नहीं हुई। इनके बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट में 2024 के चुनाव में घटे वोटों का अंतर कम या समाप्त होगा। इन्हें राज्य मंत्री के रूप में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग से जोड़ा गया है।

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