
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शुक्रवार 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर स्थायी आयोजन समिति एवं इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के पैथोलॉजी विभाग के डॉ. सुरेश बाबू उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि के तौर पर लोकबंधु अस्पताल, लखनऊ के पूर्व निदेशक डॉ. सुरेश कौशल, डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, प्रॉक्टर प्रो. राम चंद्रा , स्थायी आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. के.एल. महावर एवं इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एम. रवि कुमार मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश बाबू ने सभी को सभी को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि समस्त विश्व भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और दर्शन को मानता है। उन्होंने बताया कि बौद्ध धर्म एक तार्किक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोधपरक मानसिकता को बढ़ावा देता है, जो इसे अत्यंत प्रासंगिक बनाता है। साथ ही यह दर्शन समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे मूल्यों पर आधारित है, जो समाज को सशक्त और समरस बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारी सोच ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति होती है, इसलिए हमें सकारात्मक और तार्किक मानसिकता का विकास करना चाहिए। प्रो. बाबू ने यह भी उल्लेख किया कि आज के दौर में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब बुद्ध के विचार हमें सही दिशा प्रदान करते हैं। इसीलिए शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से हम इन सिद्धांतों को अपने जीवन में उतार सकते हैं। अंत में उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे बुद्ध के आदर्शों को अपनाकर एक शांतिपूर्ण, समावेशी और प्रगतिशील समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

विशिष्ट अतिथि डॉ. सुरेश कौशल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें स्वयं अपना दीपक बनकर ज्ञान और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाना होगा। उन्होंने जोर दिया कि प्रत्येक व्यक्ति, विशेष रूप से विद्यार्थियों को, ऊर्जा के स्रोत बनकर समाज और अपने आसपास के वातावरण में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करना चाहिए। डॉ. कौशल ने बताया कि केवल बाहरी विकास ही नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आत्मविश्लेषण भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि यही हमें अपनी कमियों को समझने और उन्हें सुधारने की दिशा में प्रेरित करता है। अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे आत्मनिर्भर बनें, अपनी क्षमताओं को पहचानें और निरंतर स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करें।
कार्यक्रम के दौरान ध्यान (मेडिटेशन) सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। साथ ही सभी को पायस वितरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शिक्षक, गैर शिक्षण अधिकारी और कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।