ऐतिहासिक उपलब्धि : जम्मू मंडल ने बांद्रा टर्मिनस के लिए बुक किए 28 पार्सल वैन

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, जम्मू : जम्मू कश्मीर के चेरी फल उत्पादकों के साथ घनिष्ठ समन्वय स्थापित करते हुए, उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल ने 2026 के सीजन में बांद्रा टर्मिनस में चेरी के परिवहन के लिए 28 पार्सल वैन के मांगपत्र बुक करने में सफलता प्राप्त की है।

प्रत्येक पार्सल वेन की क्षमता 23 टन हैं। वर्तमान में चेरी के लिए पार्सल वैन मांगपत्र की कार्यवाही जारी है। यह पिछले सीजन की तुलना में लगभग 100% की वृद्धि है। उपयोगकर्ता द्वारा सभी 28 मांगपत्रों को पंजीकृत कर लिया गया है। यह बांद्रा टर्मिनस के लिए मांगपत्र मुख्य रूप से 25 मई से 10 जुलाई तक जम्मू और श्री माता वैष्णोदेवी कटरा से चेरी के सीजन के लिए हैं।
इस अनूठी पहल के विवरण पर बात करें तो, जम्मू से बांद्रा टर्मिनस तक लोड किए जाने वाले 7 मांगपत्र है। श्री माता वैष्णो देवी कटरा से बांद्रा टर्मिनस तक लोड किए जाने वाले 21 मांग पत्र है।

उल्लेखनीय है, कि इससे पहले चेरी वर्ष 2025 में लगभग 14 पार्सल वैन द्वारा ट्रेन संख्या 12472 के माध्यम से श्री माता वैष्णोदेवी कटरा से बांद्रा टर्मिनस तक पहुंचाई गई थी। जो कि अपने आप में एक ऐतिहासिक पहल को दर्शाता है।

भारतीय रेलवे की यह पहल कश्मीर के बागवानों को उनके खराब होने वाले उत्पाद को दूर के बाजारों तक सुरक्षित और समय पर पहुँचाने के लिए एक विश्वसनीय और कुशल साधन प्रदान करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक जम्मू, उचित सिंघल ने बताया, “कि साल 2026 भी जम्मू मंडल के लिए एक ऐतिहासिक रहेगा । कश्मीर के फल उत्पादकों के साथ हमारे निरंतर संवाद और समन्वय के निरंतर सफल परिणाम आ रहे हैं । कि हमने इस चेरी सीजन के लिए बांद्रा टर्मिनस के लिए 28 मांगपत्र पंजीकृत किए हैं। जो कि पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

हमारा मुख्य उद्देश्य कश्मीर के बागवानों को एक ऐसा सुरक्षित और तीव्र परिवहन माध्यम देना था जो सड़क मार्ग की अनिश्चितताओं से मुक्त हो। यह सेवा जम्मू और श्री माता वैष्णो देवी कटरा से सीधे बांद्रा टर्मिनस तक जाएगी।

रेलवे न केवल माल ढुलाई के लागत को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि हम यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि चेरी जैसे ‘जल्दी खराब होने वाले फल अपनी पूरी ताजगी के साथ 30-33 घंटों के भीतर गंतव्य तक पहुँचें। यह पहल घाटी के किसानों की आर्थिक प्रगति में एक मील का पत्थर साबित होगी।”

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