बीबीएयू में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ विषय पर हुआ विद्यार्थी चर्चा सत्र का आयोजन

अशोक यादव, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शनिवार 11 अप्रैल को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ विषय पर विद्यार्थी चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। चर्चा सत्र का थीम ‘नीति निर्माण और नेतृत्व में महिलाओं का प्रतिनिधित्व: विचार और विमर्श’ रखा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इसके अतिरिक्त मंच पर प्रो. सुनीता मिश्रा, अंबेडकर स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज की संकायाध्यक्ष प्रो. शूरा दारापुरी, विधि विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो सुदर्शन वर्मा, आईक्यूएसी डॉयरेक्टर प्रो. शिल्पी वर्मा एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. जया श्रीवास्तव मौजूद रहीं। सर्वप्रथम प्रो. जया श्रीवास्तव ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया एवं सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया।

विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में सुनिश्चित करना कोई मात्र चर्चा का विषय नहीं, बल्कि आज के समय की अनिवार्य आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज के हर क्षेत्र चाहे वह शिक्षा, प्रशासन, नीति निर्माण, विज्ञान या अर्थव्यवस्था हो सभी में महिलाओं की सक्रिय सहभागिता नहीं होगी, तब तक समावेशी और संतुलित विकास संभव नहीं है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार विभिन्न योजनाओं और नीतियों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है, वहीं शैक्षणिक संस्थान भी इस उद्देश्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के माध्यम से महिलाओं को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है, बल्कि उन्हें नेतृत्व, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रो. मित्तल ने इस बात पर बल दिया कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल उनके व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की समग्र प्रगति से जुड़ा हुआ है। अतः आवश्यक है कि हम एक ऐसा वातावरण तैयार करें, जहाँ महिलाएँ आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें और हर क्षेत्र में अपनी निर्णायक भूमिका निभाते हुए एक सशक्त, समतामूलक और प्रगतिशील समाज के निर्माण में अपना योगदान दे सकें।

प्रो. सुनीता मिश्रा ने चर्चा के दौरान कहा कि समाज में वास्तविक और स्थायी परिवर्तन तभी संभव है, जब उसकी शुरुआत घर से हो। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि परिवार ही वह प्रथम संस्था है, जहाँ से समानता, शिक्षा और संस्कारों की नींव रखी जाती है।

प्रो. सुदर्शन वर्मा ने कहा कि संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार और अवसर प्रदान किए हैं, परंतु इन अधिकारों का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है जब महिलाएँ स्वयं जागरूक होकर उनका उपयोग करें। साथ ही उन्होंने विशेष रूप से उन्होंने मताधिकार के महत्व को भी रेखांकित किया।

प्रो. शिल्पी वर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है तथा विभिन्न योजनाओं और नीतियों के माध्यम से उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि ये सभी प्रयास तभी सार्थक सिद्ध होंगे, जब महिलाएँ स्वयं अपने अधिकारों, कर्तव्यों और उपलब्ध अवसरों के प्रति जागरूक होंगी।

प्रो. शूरा दारापुरी एवं प्रो. जया श्रीवास्तव ने भी इस महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण, समानता और समाज में उनकी सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

इस अवसर पर “नीति निर्माण और नेतृत्व में महिलाओं का प्रतिनिधित्व” विषय पर एक विस्तृत एवं विचारोत्तेजक चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। सत्र के दौरान वक्ताओं एवं प्रतिभागियों ने महिलाओं की नीति निर्माण, शासन और नेतृत्व में बढ़ती भूमिका, उनकी चुनौतियों तथा संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। चर्चा के दौरान महिलाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा, नेतृत्व विकास, तथा सामाजिक सोच में परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी गंभीर मंथन हुआ। साथ ही प्रतिभागियों द्वारा विषय से जुड़े अनेक प्रश्न प्रस्तुत किए गए, जिन पर विशेषज्ञों ने सारगर्भित उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। अंत में विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शिक्षक, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

Related Articles

Back to top button