गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में रू. 4.84 करोड़ से स्थापित किए जा रहे ईको पार्क से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा : मंत्री

अनुपूरक न्यूज़ एजेंसी, लखनऊ : उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के साथ अब इको-टूरिज्म को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में इको पार्क विकसित किया जा रहा है। करीब 4.84 करोड़ रुपए की इस परियोजना के लिए पहली किस्त के रूप में 50 लाख रुपए जारी भी कर दिए गए हैं। प्रदेश सरकार की योजना गोरखपुर को पूर्वांचल के बड़े पर्यटन हब के रूप में स्थापित करने की है।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र में प्रदेश अन्य राज्यों की तुलना में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि गोरखपुर पूर्वांचल का एक अहम केंद्र है, जहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। जिले के कुसम्ही जंगल में अत्याधुनिक इको पार्क विकसित किया जा रहा है।

गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में विकसित हो रहे आधुनिक इको पार्क में पर्यटक सुविधाओं को भव्यता के साथ तैयार किया जाएगा। 15.58 लाख रुपए की लागत से आकर्षक प्रवेश द्वार बनाया जाएगा। वहीं, 28.45 लाख रुपए से आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर विकसित होगा। एक करोड़ रुपए से अधिक की लागत से स्विस कॉटेज भी तैयार किए जाएंगे। पर्यटन प्रकृति के समीप रहकर आनंद उठा सकेंगे। उन्होंने बताया कि गोरखपुर में कई रमणीय स्थल है। ईको पार्क के स्थापित होने से पर्यटक हरियाली, के साथ शांत वन में पर्यटन का बेहतरीन अनुभव कर सकेंगे।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि इसके अलावा 32.77 लाख रुपए से कैफेटेरिया का उन्नयन किया जाएगा। वहीं, 30.88 लाख रुपए की लागत से ट्री हाउस और टेंट कैंपिंग जैसी रोमांचक सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं। इसके साथ ही 41.86 लाख रुपए की लागत से आधुनिक योग केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है, जहां पर्यटक शांत वातावरण में योग और ध्यान का लाभ उठा सकेंगे। इसी प्रकार, बायो टॉयलेट ब्लॉक, सुरक्षा फेंसिंग, सेप्टिक व्यवस्था, हरित ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए सोलर सबमर्सिबल, पार्किंग और बेंच आदि सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। गोरखपुर से कुशीनगर जाने वाले रास्ते पर पड़ने वाला कुसम्ही जंगल पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसकी दूरी गोरखपुर रेलवे स्टेशन से 10 किलोमीटर है। इसी मार्ग पर गोरखपुर एयरपोर्ट और भगवान बुद्ध से जुड़े स्थल हैं। वहीं, शहर का प्रसिद्ध रामगढ़ ताल भी महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि उ०प्र० इको टूरिज्म बोर्ड गठन के बाद से पर्यटन विभाग की दृष्टि प्रदेश में फैले जंगल, नदियों और झीलों पर है। जिसके तहत इन प्राकृतिक स्थलों को संरक्षित रखते हुए उन्हें पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य न केवल पर्यटकों को नए और आकर्षक डेस्टिनेशन उपलब्ध कराना है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाना है। विभाग द्वारा विभिन्न जनपदों में इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट्स को चिन्हित कर वहां आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि प्रदेश पर्यटन के नक्शे पर और मजबूती से उभर सके। पर्यटक दोनों स्थलों को भ्रमण कर सकेंगे।

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