बीबीएयू में ‘जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति, चुनौतियाँ और करियर के मार्ग : अनुसंधान, नवाचार और उद्योग के बीच सेतु निर्माण’ पर द्विदिवसीय संगोष्ठी का हुआ उद्घाटन

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शुक्रवार 27 मार्च को ‘जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति, चुनौतियाँ और करियर के मार्ग: अनुसंधान, नवाचार और उद्योग के बीच सेतु निर्माण’ विषय पर आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन हुआ। यह राष्ट्रीय संगोष्ठी जैव प्रौद्योगिकी विभाग, बीबीएयू एवं ट्रस्ट फॉर एजुकेशन एंड ट्रेनिंग इन साइटोमैट्री के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गयी। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि के तौर पर आईआईएस- ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष प्रो. अमित अवस्थी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर पद्मश्री प्रो. सरोज चूणामणि गोपाल एवं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, रायबरेली की निदेशक प्रो. शुभिनि ए. सराफ, ट्रस्ट फॉर एजुकेशन एंड ट्रेनिंग इन साइटोमैट्री की को-फाउंडर डॉ. रेखा गौड़, स्कूल ऑफ लाइफ साइंस की संकायाध्यक्ष प्रो. संगीता‌ सक्सेना, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डी. आर. मोदी एवं आयोजन सचिव डॉ. सुनील बाबू गोसीपटाला मौजूद रहे।

विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने इस BioACC 2026 राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए जैव प्रौद्योगिकी में शोध और उद्योग के बीच सशक्त समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों को नवाचार एवं बहुविषयी अनुसंधान के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि एवं आईआईएस- ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष प्रो. अमित अवस्थी ने अपने विचारों में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर के अवसरों और शोध की चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने अकादमिक और उद्योग के बीच सहयोग को भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।

विशिष्ट अतिथि पद्मश्री प्रो. सरोज चूणामणि गोपाल ने जैव प्रौद्योगिकी के सामाजिक एवं चिकित्सीय क्षेत्रों में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने नवाचार को देश के विकास का प्रमुख आधार बताया।

विशिष्ट अतिथि एवं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, रायबरेली की निदेशक प्रो. शुभिनि ए. सराफ ने अपने संबोधन में जैव प्रौद्योगिकी के नवीन रुझानों और कौशल विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।

ट्रस्ट फॉर एजुकेशन एंड ट्रेनिंग इन साइटोमैट्री की को-फाउंडर डॉ. रेखा गौड़ ने अपनी संस्था के बारे में बताते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य साइटोमैट्री के क्षेत्र में प्रशिक्षण, जागरूकता और अनुसंधान को बढ़ावा देना है। डॉ. गौड़ ने बताया कि यह संस्था विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के साथ सहयोग स्थापित कर ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देती है।

इस अवसर पर प्रतिभागियों के लिए दो विशेष सत्रों का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र ‘जैव प्रौद्योगिकी में हालिया प्रगति (Recent Advancements in Biotechnology) विषय पर तथा द्वितीय सत्र ‘ट्रांसलेशनल जैव प्रौद्योगिकी एवं उद्योग इंटरफेस–I (Translational Biotechnology & Industry Interface-I ) विषय पर आयोजित किया गया। साथ ही संकाय सदस्यों एवं प्रतिभागियों के लिए ओरल प्रेजेंटेशन एवं पोस्टर प्रजेंटेशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम उपरांत प्रो. डी.आर. मोदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों से आये प्रतिभागी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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