
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार 25 मार्च को विधि विभाग, सेंटर फॉर इनोवेशन, इनोवेशन एंड इंटरप्रेन्योरशिप, इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर एकदिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि के तौर पर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी, मुख्य वक्ता के तौर पर आईटीएजी बिजनेस सॉल्यूशंस लिमिटेड, कोलकाता के फाउंडिंग डॉयरेक्टर डॉ. धनपत राम अग्रवाल एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. क्षितिज सिंह, विधि विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सुदर्शन वर्मा, विधि अध्ययन विद्यापीठ के संकायाध्यक्ष प्रो संजीव कुमार चढ्ढा एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सूफिया अहमद मौजूद रहीं।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि यदि मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च स्थान देकर कार्य किया जाए, तो वर्तमान समय में हो रहे बौद्धिक संपदा अधिकार के हनन को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आईपीआर केवल कानूनी संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह नैतिकता, जिम्मेदारी और सृजनात्मकता से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

मुख्य अतिथि एवं ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का युवा वर्ग एक सशक्त शिक्षा प्रणाली का लाभ उठा रहा है, जहां उद्यमिता के साथ-साथ हमारी समृद्ध परंपराओं को भी समान रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विशिष्ट अतिथि एवं उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने अपने वक्तव्य में बौद्धिक संपदा अधिकार के संदर्भ में उभरती प्रौद्योगिकियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य इमर्नेजिंग टैक्नोलॉजी ने नवाचार की गति को तेज किया है, लेकिन साथ ही आईपीआर के संरक्षण के सामने नई चुनौतियाँ भी खड़ी की हैं जैसे- डेटा स्वामित्व, कंटेंट की मौलिकता और कॉपीराइट का उल्लंघन।

मुख्य वक्ता एवं आईटीएजी बिजनेस सॉल्यूशंस लिमिटेड, कोलकाता के फाउंडिंग डॉयरेक्टर डॉ. धनपत राम अग्रवाल ने औद्योगिक क्रांति के संदर्भ में अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान युग में तकनीक के आधार पर निरंतर आगे बढ़ना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही विकास और प्रतिस्पर्धा की प्रमुख कुंजी है।
मुख्य वक्ता एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. क्षितिज सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय लिविंग नॉलेज इकोनॉमी का युग है, जहां औद्योगिक विकास के साथ-साथ सूचना आधारित समाज में बौद्धिक संपदा अधिकार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने जोर दिया कि नीति-निर्माताओं, विधि विशेषज्ञों और आईपीआर प्रैक्टिसनर्स को मिलकर कार्य करना चाहिए, ताकि एक सशक्त आईपीआर तंत्र विकसित हो सके।
इस अवसर पर प्रतिभागियों के लिए विषय की गहन समझ विकसित करने हेतु दो विशेष सत्रों का आयोजन किया गया। इन सत्रों में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे कॉपीराइट, पेटेंट, ट्रेडमार्क एवं उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। प्रथम सत्र दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. क्षितिज सिंह की अध्यक्षता में तथा द्वितीय सत्र मानवाधिकार विभाग, बीबीएयू की विभागाध्यक्ष प्रो. प्रीति मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. सुनीता मिश्रा द्वारा की गयी। इसके अतिरिक्त आईक्यूएसी निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा उपस्थित रहीं। समापन सत्र के दौरान प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्रो. संजीव कुमार चढ्ढा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. अनीस अहमद, डॉ. मुजीबुर्रहमान, डॉ. प्रदीप कुमार, अन्य शिक्षक, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।