
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर डिजिटल गवर्नेंस और कौशल विकास के क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) की अभिनव पहल ‘कौशल दर्पण’ को ET GovTech Annual Awards 2026 में एआई एवं डेटा एनालिटिक्स फॉर पब्लिक गुड श्रेणी में प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान नई दिल्ली में आयोजित GovTech Conclave के दौरान प्रदान किया गया, जिसे एडिश्नल डायरेक्टर आशीष कुमार ने मिशन निदेशक पुलकित खरे की ओर से ग्रहण किया।
प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि यह उपलब्धि योगी आदित्यनाथ सरकार के उस विजन को मजबूत करती है, जिसमें तकनीक के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ने और शासन को अधिक पारदर्शी व परिणामोन्मुख बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इकोनॉमिक टाइम्स समूह और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से आयोजित इस राष्ट्रीय मंच पर ‘कौशल दर्पण’ को सार्वजनिक हित में तकनीक के प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण माना गया।
योगी सरकार के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल ट्रेनिंग से लेकर प्लेसमेंट तक हर चरण की निगरानी करती है। प्लेटफॉर्म पर प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उपस्थिति, लक्ष्य के मुकाबले उपलब्धि और रोजगार की स्थिति का रीयल-टाइम विश्लेषण संभव है। इससे नीतिगत फैसले अधिक सटीक और प्रभावी बन रहे हैं, जो सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं।
दरअसल, ‘कौशल दर्पण’ केवल एक पोर्टल नहीं बल्कि एक स्मार्ट गवर्नेंस टूल है, जिसने कौशल विकास की पूरी प्रणाली को डेटा आधारित बना दिया है। पहले जहां युवाओं की स्किल प्रोफाइल और वास्तविक जरूरतों के बीच बड़ा अंतर था, वहीं अब एआई और डेटा एनालिटिक्स के जरिए यह स्पष्ट हो जाता है कि किस जिले में किस प्रकार के कौशल की मांग है और किस सेक्टर में रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं।
‘कौशल दर्पण’ की सबसे बड़ी खासियत इसका इंटीग्रेटेड मॉडल है, जो सरकार, प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत को एक ही मंच पर जोड़ता है। डिस्ट्रिक्ट डिमांड और टारगेट फीचर के जरिए जिलेवार स्किल गैप का विश्लेषण किया जाता है, जबकि जॉब लिस्टिंग सेक्शन युवाओं को सीधे रोजगार के अवसरों से जोड़ता है। ट्रेनिंग पार्टनर्स की रैंकिंग ए, बी, सी और दी ग्रेड में होने से प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता दोनों में सुधार आया है।
मिशन निदेशक पुलकित खरे के अनुसार, पहले स्किल डेटा की कमी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन अब एआई आधारित इस प्लेटफॉर्म के जरिए रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध है, जिससे प्रशिक्षण और रोजगार के बीच संतुलन बनाना संभव हो पाया है। ‘कौशल दर्पण’ न केवल उत्तर प्रदेश के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बनकर उभरा है। यह पहल दिखाती है कि अगर तकनीक का सही उपयोग किया जाए तो सरकारी योजनाएं न सिर्फ प्रभावी बन सकती हैं बल्कि युवाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव भी ला सकती हैं। योगी सरकार की ‘स्किल यूपी, एम्प्लॉयड यूपी’ की दिशा में यह कदम प्रदेश को देश के अग्रणी कौशल विकास केंद्र के रूप में स्थापित करने की ओर एक मजबूत संकेत है।