
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में गुरुवार 19 मार्च को हिन्दू नूतन वर्षारम्भ के अवसर पर हिन्दू नववर्ष महोत्सव का आयोजन किया गया। यह आयोजन बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, नववर्ष चेतना समिति, लखनऊ एवं श्याम परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के तौर पर महामण्डलेश्वर गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि के तौर पर बीबीएयू कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल एवं विधान परिषद सदस्य, उत्तर प्रदेश पवन सिंह चौहान, मुख्य वक्ता एवं भारतीय इतिहास संकल्प योजना के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री संजय श्रीहर्ष मिश्र, नववर्ष चेतना समिति के अध्यक्ष डॉ. गिरीश गुप्ता, नववर्ष चेतना समिति के उपाध्यक्ष सुधीर एस. हलवासिया एवं नववर्ष चेतना समिति की मुख्य संरक्षिका श्रीमती रेखा त्रिपाठी मुख्य तौर पर मंच पर मौजूद रहीं। मंच संचालन का कार्य श्रीमती प्रियंका द्वारा किया गया।

मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानंद जी महाराज ने सभी उपस्थित जनों को हिंदू नव वर्ष एवं नवरात्रि के प्रारंभ होने की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि ‘हिंदू’ केवल एक शब्द या संप्रदाय नहीं, बल्कि इन सीमाओं से परे एक व्यापक जीवन-दृष्टि, परंपरा और विचारधारा है, जो मानव जीवन के मूल्यों के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को जागृत करती है। यह विचारधारा समूचे विश्व को ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश देती है और समरसता, सहअस्तित्व एवं विश्व बंधुत्व की भावना को सशक्त बनाती है।
विशिष्ट अतिथि बीबीएयू कुलपति प्रो राज कुमार मित्तल ने सभी उपस्थितजनों को हिंदू नववर्ष की हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि आज हिंदू एवं भारतीय ज्ञान परंपरा और दर्शन संपूर्ण विश्व को एक नई दिशा प्रदान करने का कार्य कर रहा हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्तमान समय में विश्व के अनेक हिस्सों में अलगाव, तनाव और असंतुलन की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, जिसका समग्र समाधान भारतीय दर्शन में निहित है।

विशिष्ट अतिथि पवन सिंह चौहान ने अपने उद्बोधन में हिंदू दर्शन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को संतुलित, नैतिक और सार्थक बनाने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करती है।
नववर्ष चेतना समिति, लखनऊ के अध्यक्ष डॉ. गिरीश गुप्ता ने अपने वक्तव्य में बताया कि किस प्रकार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने हिंदू नव वर्ष को पुनः समाज में प्रतिष्ठित करने के लिए निरंतर एवं संगठित प्रयास किए हैं। साथ ही उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए उल्लेख किया कि सन् 1588 में जिस राम मंदिर को बाबर द्वारा ध्वस्त किया गया था, उसका पुनर्निर्माण राजा विक्रमादित्य द्वारा कराया गया था।
कार्यक्रम के दौरान नव वर्ष के महत्व एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को केंद्र में रखकर एक अत्यंत प्रभावशाली और ज्ञानवर्धक डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। इस डॉक्यूमेंट्री में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) एवं नव वर्ष चेतना समिति के उद्देश्यों, उनकी कार्यप्रणाली तथा समाज के प्रति उनके समर्पित प्रयासों को विस्तारपूर्वक एवं सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के दौरान नव वर्ष चेतना समिति के वार्षिक मुखपत्र नव चैतन्य वन्दे मातरम् सार्धशति अंक एवं नववर्ष चेतना समिति की औपचारिक वेबसाइट का लोकार्पण भी किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, नववर्ष चेतना समिति, लखनऊ एवं श्याम परिवार के सदस्य एवं विश्वविद्यालय के अन्य विद्यार्थी मौजूद रहे।