
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार 11 मार्च को ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन के माध्यम से सतत ग्रामीण परिवर्तन (Sustainable Rural Transformation through Science, Technology and Management)’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय रूरल साइंस कांग्रेस – 2026 का समापन हुआ। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम प्रबंध अध्ययन विभाग, बीबीएयू एवं प्रो. एच.एस. श्रीवास्तव फाउंडेशन फॉर साइंस एंड सोसाइटी, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 9- 11 मार्च तक आयोजित किया गया। समापन सत्र के दौरान मुख्य अतिथि के तौर पर मिडवेस्ट विश्वविद्यालय, नेपाल के प्रो. दीप बहादुर रावल उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि एवं चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, उन्नाव परिसर, उत्तर प्रदेश की डॉ. अलका सिंह, प्रो. एच.एस. श्रीवास्तव फॉर साइंस एंड सोसाइटी के प्रो. राणा प्रताप सिंह, प्रबंध अध्ययन विभाग, बीबीएयू के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार सिंह एवं डॉ. रमेश कुमार चतुर्वेदी उपस्थित रहे। सर्वप्रथम प्रो. अमित कुमार सिंह ने कार्यक्रम में सभी लोगों का स्वागत किया एवं सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया।
मुख्य अतिथि एवं मिडवेस्ट विश्वविद्यालय नेपाल के प्रो. दीप बहादुर रावल ने ने इस प्रकार के कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी। अपने वक्तव्य में उन्होंने शोध-पत्र (पेपर) तैयार करने और प्रस्तुत करते समय बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रभावी ढंग से शोध-पत्र तैयार करने तथा उसे आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अलका सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को ज्ञान साझा करने का अवसर मिलता है, साथ ही वे विभिन्न क्षेत्रों के प्रख्यात विद्वानों और विशेषज्ञों से मिलकर अपने अनुभवों और विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास होता है और वे अपने विषय की गहरी समझ प्राप्त कर पाते हैं।
प्रो. एच.एस. श्रीवास्तव फॉर साइंस एंड सोसाइटी के प्रो. राणा प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज भी शोध कार्यों को और अधिक प्रभावी तथा सार्थक बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय में ग्रीन इकोनॉमी का होगा, इसलिए इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए शोध कार्यों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर कार्यक्रम में सहभागिता करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित किया गया। प्रमाण पत्र वितरण के माध्यम से उनके सक्रिय योगदान, उत्साहपूर्ण भागीदारी और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गयी। साथ ही आयोजन समिति की ओर से मंचासीन अतिथियों एवं शिक्षकों को स्मृति चिन्ह भेंट करके उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। अंत में डॉ. रमेश कुमार चतुर्वेदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शिक्षक, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।