
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, इंदौर : भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तीन‑चौथाई से अधिक योगदान पारिवारिक व्यवसायों का है और 2047 तक देश की वृद्धि में उनकी भूमिका और भी बड़ी होने की उम्मीद है। इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस (आईएसबी) के नए अध्ययन में सामने आया है कि मध्यम आकार के कई पारिवारिक उद्यमों को अभी-भी भारत में हो रही आर्थिक वृद्धि का लाभ नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि वो अल्पकालिक लाभ पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं, जिसकी वजह से वो टेक्नोलॉजी और इकोसिस्टम के माध्यम से भविष्य के लिए निवेश नहीं कर पाते, जो ग्लोबल कंपनियों को मिलने वाली बढ़त होती है।
आईएसबी की नई रिपोर्ट, ‘‘बिज़नेस इनोवेशन- एन इंपरेटिव फॉर इंडियन फैमिली-लेड बिज़नेस’ (बिज़नेस इनोवेशन- भारत में पारिवारिक उद्यमों के लिए जरूरी) में सामने आया है कि पारिवारिक व्यवसाय स्थानीय और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद होते हैं, लेकिन फिर भी इनमें से कई व्यवसाय धीरे-धीरे बढ़ने वाले विकास मॉडल्स पर आश्रित हैं, और उच्च वृद्धि करने वाले सेक्टर्स का पूरा लाभ नहीं ले पाते हैं।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि पारिवारिक उद्यमों को सबसे बड़ा जोखिम बाजार के उतार-चढ़ाव से नहीं, बल्कि रणनीति की गतिहीनता से हो रहा है। डिजिटल परिवर्तन, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और विकसित होते हुए ग्राहक बाजार के वातावरण में यदि भारतीय व्यवसायों द्वारा खासकर ग्लोबल साउथ के उच्च वृद्धि वाले क्षेत्र में विकास के इंटीग्रेटेड मॉडल और टेक्नोलॉजी, जिसमें एआई भी शामिल है, एवं पार्टनरशिप्स में साहसी निवेश नहीं किया जाएगा, तो इससे उनका दायरा और वैश्विक विस्तार बाधित होगा।
प्रोफेसर राजेंद्र श्रीवास्तव, नोवार्टिस प्रोफेसर ऑफ मार्केटिंग स्ट्रेटेजी एंड इनोवेशन, आईएसबी और एग्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर, आईएसबी सेंटर फॉर बिज़नेस इनोवेशन, ने कहा, “भारत में पारिवारिक व्यवसाय एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं, जहाँ उन्हें प्रबंधन और विरासत को बनाए रखने के साथ फुर्ती और इनोवेशन की जरूरत भी है। “