भारत रत्न नानाजी देशमुख की 16वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : भारत रत्न नानाजी देशमुख की 16 वीं पुण्यतिथि पर दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा दीनदयाल परिसर चित्रकूट में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में पूज्य बद्री प्रपन्नाचार्य जी महाराज आचार्य आश्रम चित्रकूट, डॉ आर के सिंह पटेल पूर्व सांसद बाँदा एवं पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश, अनूप मिश्रा पूर्व मंत्री मध्यप्रदेश, योगेश ताम्रकार महापौर सतना, अनिल जैन कालुहेडा विधायक उज्जैन उत्तर, वी एस जामोद आयुक्त रीवा संभाग, प्रो. ए डी एन बाजपेयी कुलपति अटल विहारी बाजपेयी विश्वविद्यालय विलासपुर, प्रो. राजेंद्र कुरारिया कुलगुरु अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा, डॉ अरविंद कुमार शुक्ल कुलगुरु राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर, डॉ. राजवीर सिंह उप महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिसद, डॉ आई पी त्रिपाठी कुलगुरु छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय, डॉ. एम आर के सिंह निदेशक अटारी जबलपुर, पदमश्री उमाशंकर पांडेय, प्रो. भरत मिश्र पूर्व कुलगुरु महात्मा गाँधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट, पुष्पराज सिंह परिहार सामाजिक कार्यकर्ता सीधी एवं दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव निखिल मुंडले, उपाध्यक्ष उत्तम बनर्जी, उपाध्यक्ष अतुल जैन, कोषाध्यक्ष वसंत पंडित तथा कलेक्टर सतना डॉ सतीश कुमार एस, पुलिस अधीक्षक सतना हंसराज सिंह द्वारा नानाजी की प्रतिमा के समक्ष पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

इस अवसर पर पिछले तीन दिनों में संपन्न हुए अलग अलग सेमिनारों की रिपोर्टिंग सेमिनार के समन्वय डॉ मनोज त्रिपाठी, डॉ राजेंद्र सिंह नेगी, डॉ नवीन शर्मा, डॉ दीपेश मिश्रा, डॉ पंकज शर्मा, अनिल सिंह द्वारा प्रस्तुत की गई। संचालन सीईओ अमिताभ वशिष्ठ द्वारा किया गया। स्वागत उद्बोधन दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव निखिल मुंडले द्वारा दिया गया।

इस अवसर पर कुलगुरु प्रो एडीएन वाजपेई ने अपने उद्बोधन में कहा कि नाना जी का व्यक्तित्व सर्व समावेशी था। मैं 2003 में एपीएस विश्वविद्यालय रीवा का कुलपति होने के बाद श्रद्धेय नाना जी के मार्गदर्शन से मुझे ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति का भी प्रभार मिला और नाना जी के ग्राम विकास के प्रयोगों को नजदीकी से देखने का अवसर मिला।

रीवा कमिश्नर बीएस जामोद ने कहा कि नानाजी ने भौतिक चकाचौंध को छोड़कर चित्रकूट जैसे पिछड़े क्षेत्र में अपनी प्रयोगशाला बनाई और पीड़ित, उपेक्षित लोगों के विकास के लिए विविध प्रकल्पों के माध्यम से सर्वांगीण विकास का प्रयोग करके दिखाया। ऐसे देव तुल्य व्यक्तित्व को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धा पुष्प अर्पित करता हूं।

श्रद्धांजलि समारोह के अवसर पर स्वावलंबन अभियान 2.0 की प्रस्तावना रखते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के कोषाध्यक्ष वसंत पंडित ने बताया कि नानाजी ने जब 26 जनवरी 2002 को चित्रकूट के ग्रामों में स्वावलंबन अभियान की शुरुआत पांच प्रमुख बिंदुओं जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार, हराभरा विवाद मुक्त ग्राम की कल्पना को शामिल किया था, अब आधुनिकता के आधार पर स्वावलंबन अभियान 2.0 ‘शाइन’ के रुप में शुरुआत करने का प्रयास किया जा रहा है। इसे SHINE: Sustainability and Happiness Index for a New Era (एक नए युग के लिए स्थिरता और खुशहाली सूचकांक) के माध्यम से मापा जाएगा। जो स्वावलंबी ग्राम विकास ढ़ांचा तैयार करने में सहायक सावित होगा।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान स्वावलंबन अभियान 2.0 की शपथ का वाचन आचार्य आश्रम चित्रकूट के राजगुरु स्वामी प्रपन्नाचार्य जी महाराज द्वारा सभी लोगों को कराया गया; “हम सभी ग्रामवासी परस्पर सहयोग के आधार पर अपने ग्राम को स्वावलम्बी बनाने की प्रतिज्ञा करते हैं।

अपने आशीर्वचनों में राजगुरु स्वामी श्री प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कहा कि ऋषि तो हमेशा युग दृष्टया होता है। नानाजी निश्चित रूप से युग मनीषी थे। जिस तरह महर्षि वाल्मीकि जी ने प्रभु श्री राम को चित्रकूट का मार्ग सुझाया था, चित्रकूट गिरि करहुँ निवासू, तहं तुम्हार सब भांति सुपासू।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए दीनदयाल शोध संस्थान के वरिष्ठ उपाध्यक्ष उत्तम बनर्जी ने कहा कि श्रद्धांजलि कार्यक्रम में हजारों लोगों की सामूहिक सहभागिता इसे सामाजिक चेतना के महाकुंभ के रूप में प्रदर्शित कर रही है। सर्वे भवंतु सुखिनः कल्याण मंत्र के साथ श्रद्धांजलि सभा का समापन हुआ।  

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