बीबीएयू में ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल- 2025’ विषय पर संगोष्ठी एवं चर्चा सत्र का आयोजन

मध्य प्रदेश

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में मंगलवार 24 फरवरी को बीबीएयू एवं भारतीय शिक्षण मंडल अवध‌ प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल- 2025’ विषय पर संगोष्ठी एवं चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन‌ जी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल, विशिष्ट अतिथि एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी, मुख्य वक्ता एवं रामदेव बाबा विश्वविद्यालय, नागपुर के चांसलर एवं एआईसीटीई के पूर्व चेयरमैन डॉ. एस.एस. मांथा एवं बीबीएयू के प्रो. कमल जायसवाल उपस्थित रहे।


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन‌ ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में अर्थ और ज्ञान दोनों ही समान रूप से आवश्यक हैं, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को ज्ञान अर्जित करने के साथ-साथ अर्थोपार्जन भी करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए तीन तत्व अनिवार्य होते हैं—आधार, साधन और कर्ता।

कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल देश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना नहीं है, बल्कि भारत को सामाजिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी समृद्ध एवं संतुलित बनाना है। ‘लाइट एंड टाइट’ का मूलमंत्र देते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य जहां नागरिकों को सकारात्मक और ऊर्जावान बनाए रखते हैं, वहीं उन्हें गंभीरता, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ अपनाना भी आवश्यक है, क्योंकि इन्हीं के माध्यम से विकसित भारत–2047 का स्वप्न साकार हो सकेगा।

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत एक व्यापक प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जो विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 के माध्यम से सामने आया है। उन्होंने विभिन्न प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों के लिए निर्धारित मानकों और स्टैंडर्ड्स की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह व्यवस्था गुणवत्ता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

रामदेव बाबा विश्वविद्यालय, नागपुर के चांसलर एवं एआईसीटीई के पूर्व चेयरमैन डॉ. एस.एस. मांथा ने चर्चा के दौरान कहा कि विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) विधेयक, 2025 उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक व्यापक और संरचनात्मक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को प्रभावी रूप से लागू करना है।

अंत में आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं शॉल भेंट करके उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। साथ ही गृह विज्ञान विद्यापीठ की संकायाध्यक्ष प्रो. यूवी किरण ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिये दो विशिष्ट तकनीकी सत्रों तथा एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति प्रो. अजय तनेजा एवं क्रीड़ा भारती के अध्यक्ष इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह उपस्थित रहे। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शसानी एवं केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर के प्रो. सर्वनारायण झा उपस्थित रहे।

समस्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, आमंत्रित अतिथिगण, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
          

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