
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार 1 अप्रैल को सतत् विकास लक्ष्य समिति एवं इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के संयुक्त तत्वावधान में ‘बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय सतत् विकास की ओर अग्रसर’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इसके अतिरिक्त मंच कार्यक्रम संयोजक और सतत् विकास लक्ष्य समिति एवं इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के चेयरपर्सन प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा एवं बीबीएयू सलाहकार प्रो. मनोज जोशी उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज का समय केवल विचारों तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि उन्हें साकार करने का है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ‘आईडिया से ज्यादा कुछ भी शक्तिशाली नहीं होता’ लेकिन उस विचार को आगे बढ़ाने के लिए नवाचार, रचनात्मकता और उद्यमिता की आवश्यकता होती है। उन्होंने ‘कृष्णा पिकल्स’ और ‘फ्लिपकार्ट’ जैसे सफल उद्यमों के उदाहरण देकर यह समझाया कि कैसे छोटे स्तर से शुरू होकर बड़े स्तर तक पहुँचा जा सकता है और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम संयोजक प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की सतत विकास लक्ष्य समिति और इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन समितियों का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को नवाचार, स्थिरता (sustainability) और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।
बीबीएयू के सलाहकार प्रो. मनोज जोशी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी के विचार भविष्य में एक बड़े व्यवसाय का रूप ले सकते हैं, बशर्ते उन पर सही दिशा में और समर्पण के साथ कार्य किया जाए। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए यह लक्ष्य निर्धारित करने पर बल दिया कि आने वाले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय से कम से कम 100 स्टार्ट-अप्स विकसित हों, जो न केवल समाज में अपनी पहचान बनाएँ बल्कि विश्वविद्यालय का नाम भी गौरवान्वित करें।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने बीबीएयू के विद्यार्थियों व ‘सस्टेनेबल एंबेसडर्स’ से सौहार्दपूर्ण भेंट की और सतत विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। इस संवाद के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों के विचारों, अनुभवों और नवाचारी प्रयासों को समझा तथा उन्हें समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को और अधिक सक्रियता से निभाने के लिए प्रेरित किया।
अंत में डॉ. राजश्री ने धन्यवाद ज्ञापित किया, कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
