
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली / वाशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को तबाह कर देने के दावे के विपरीत स्टेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों का आवागमन सामान्य नहीं होने से चिंतित नजर आ रहे हैं। स्टेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले टैंकरों को उड़ा देने की ईरान की धमकी के कारण अमेरिका और यूरोपीय देशों में ईंधन का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हालात से निबटने के लिए हाल ही में अपने सहयोगी देशों से अपील की थी कि वे मध्य पूर्व में स्थित स्टेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा के लिए अपने युद्धपोत भेजें क्योंकि यहीं से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का व्यापार होता है।इसी वजह से ये समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की इस अपील को कई देशों से खास समर्थन नहीं मिला है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए सहयोगी देशों से उनके युद्धपोत भेजने की जोरदार अपील की थी। यह जल मार्ग “अमेरिका के गले की फांस” बन गया है। डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए सहयोगी देशों से युद्धपोत भेजने की मांग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठंडी प्रतिक्रिया मिली है, जिससे यह पहल बेअसार साबित हो रही है। चीन, जापान और ब्रिटेन जैसे प्रमुख देशों ने तुरंत सकारात्मक जवाब नहीं दिया, जिससे यह रणनीतिक मार्ग पर अमेरिका की अकेले कमान संभालने जैसी स्थिति बन गई है। जापान और ऑस्ट्रेलिया ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया है। साथ ही बाकी देशों से भी कोई जवाब नहीं मिला है।
जापान और ऑस्ट्रेलिया ने सोमवार को साफ कर दिया कि इस इलाके में अपनी नौसेना के जहाज भेजने की फिलहाल उनकी कोई योजना नहीं है। दोनों देशों का मानना है कि इस तरह का फैसला लेने से पहले स्थिति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर और विचार करना जरूरी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक बयान में कहा था कि अमेरिका 7 देशों से बात कर रहा है ताकि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखा जा सके। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, ‘देखना दिलचस्प होगा कि कौन-कौन से देश हमारी मदद नहीं करते। अगर मदद करते हैं तो अच्छा, नहीं करते तो भी अच्छा। ‘ ट्रंप ने कहा कि यह छोटा-सा प्रयास है क्योंकि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता अब बहुत कम हो चुकी है।
दक्षिण कोरिया ने कहा कि वो इसपर विचार करेगा
सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार आस्ट्रेलिया और जापान के इन्कार के बावजूद कुछ अन्य देशों का सकारात्मक रुख भी सामने आया है। दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह इस मामले पर अभी विचार कर रहा है और स्थिति का आकलन करने के बाद फैसला लिया जाएगा। इसके साथ ही तुर्की और फ्रांस ने भी फिलहाल अपने जहाज भेजने को लेकर सावधानी भरा रुख अपनाया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले ईरान को सख्त चेतावनी दी थी। ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान इस रास्ते तेल का आवागमन रोकने की कोशिश करता है तो उसे भारी कीमत चुकानी होगी। अमेरिका की तरफ से अभी जो उसे मार पड़ रही है, वह 20 गुना ज्यादा बढ़ जाएगी। इसके अलावा आसानी से निशाना बनाए जा सकने वाले हम उन लक्ष्यों को निशाना बनाना शुरू कर देंगे जिसके बाद ईरान को एक देश के रूप में दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होना एक तरह से असंभव हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि इसके बाद ईरान में मौत, आग और अराजकता का माहौल होगा। लेकिन इन धमकियों का ईरान पर कोई असर नहीं हुआ। ईरान ने इसे “दुश्मनों” के लिए बंद किया है और अमेरिकी अपील की आलोचना की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से रोजाना करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में अगर इस रास्ते पर किसी तरह की रुकावट आती है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।