सुरक्षित हाईवे, सुरक्षित समाज : हाईवे एवं महिला सुरक्षा के प्रति DBCPL की प्रतिबद्धता

सूर्योदय हैरत समाचार सेवा, भोपाल / देवास : भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग कुल यातायात का मात्र 2% वहन करते हैं, फिर भी सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में इनकी हिस्सेदारी लगभग 30% है — एक कड़वी और चिंताजनक सच्चाई। मध्यप्रदेश के हाई-स्पीड कॉरिडोर पर अपर्याप्त संकेतक, चालकों में जागरूकता की कमी और आपातकालीन तैयारियों का लगभग पूर्ण अभाव इस खतरे को और गहरा बनाता है। इन कॉरिडोर के किनारे रहने और काम करने वाले समुदाय सबसे अधिक कीमत चुकाते हैं — और इनमें महिलाएं सबसे अधिक असुरक्षित हैं। चाहे वे यात्री हों, नियमित आवागमन करने वाली हों, या सड़क किनारे के गांवों की निवासी — हाईवे कॉरिडोर पर महिलाओं को अक्सर कोई दृश्यमान सुरक्षा सहायता, आपातकालीन हेल्पलाइन की जानकारी या स्वयं की सुरक्षा के लिए कोई संरचित संसाधन उपलब्ध नहीं होता।

इस ज़मीनी हकीकत को पहचानते हुए DBCPL ने मध्यप्रदेश में अपने हाईवे कॉरिडोर पर एक व्यापक और समुदाय-केंद्रित सड़क सुरक्षा कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान, महत्वपूर्ण स्थानों पर बेहतर यातायात संकेतक, स्थानीय हितधारकों के लिए आपातकालीन तैयारी प्रशिक्षण और व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए विशेष संवेदनशीलता सत्र शामिल हैं — यह वह वर्ग है जो हाईवे दुर्घटनाओं में सबसे अधिक जोखिम में रहता है।

महिला सुरक्षा के मामले में संस्था केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि ठोस कदम उठाए हैं। कॉरिडोर के रेस्ट एरिया और टोल प्लाज़ा पर महिला आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए हैं, ताकि संकट की स्थिति में किसी भी महिला को तुरंत और सहजता से सहायता मिल सके। इससे भी आगे बढ़ते हुए, DBCPL ने हाईवे से सटे समुदायों की महिलाओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यशालाएं और आत्मरक्षा शिविर आयोजित किए हैं। अब तक 100 से अधिक महिलाएं इन सत्रों में सीधे भाग ले चुकी हैं, जहां उन्होंने व्यावहारिक सुरक्षा ज्ञान, आपातकालीन प्रतिक्रिया कौशल और आत्मविश्वास हासिल किया है।

संस्था ने अपने CSR कार्यक्रम में स्वास्थ्य जागरूकता शिविर, प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण और आपातकालीन सहायता सेवाओं को भी शामिल किया है — अपनी जिम्मेदारी को सड़क की सतह से आगे बढ़ाकर उसके किनारे रहने वाले लोगों तक विस्तारित किया है।

इन प्रयासों के नतीजे ज़मीन पर साफ दिखाई दे रहे हैं। हजारों हाईवे उपयोगकर्ता और आसपास के समुदायों के निवासी अब अधिक जागरूक, सतर्क और सड़क सुरक्षा के प्रति बेहतर सूचित हैं। बेहतर संकेतक और संवेदनशील चालक कॉरिडोर पर अधिक सुरक्षित यात्रा वातावरण बनाने में योगदान दे रहे हैं। संस्था, स्थानीय हितधारकों और प्रशासन के बीच मजबूत समन्वय ने ज़रूरत के समय त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया को संभव बनाया है।

महिलाओं के लिए यह प्रभाव संख्याओं से परे है। हाईवे के सार्वजनिक स्थानों पर हेल्पलाइन जानकारी प्रदर्शित होने से अकेले सफर करने वाली महिला के लिए सुरक्षा सहायता अब न अदृश्य है, न अपहुंच। जागरूकता कार्यशालाओं और आत्मरक्षा शिविरों में भाग लेने वाली 100 से अधिक महिलाएं अपने साथ केवल कौशल नहीं, बल्कि एक नई सुरक्षा-चेतना और आत्मनिर्भरता का भाव लेकर लौटी हैं — और यह बदलाव उनके परिवारों और समुदायों में भी फैलता है।

इस पहल के मूल में वह विश्वास है जो DBCPL के हर कदम को दिशा देता है — जो हाईवे महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं, वह सच में सुरक्षित नहीं। और जो हाईवे विकास सड़क के किनारे रहने वाले लोगों का जीवन नहीं सुधारता, वह अधूरा विकास है।

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