
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चित्रकूट : महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की कला वीथिका में सोमवार तीन दिवसीय राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला एवं प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने कलर के माध्यम से कैनवास में गणेश आकृति बनाकर किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चित्रकार सुश्री गीता दास उपस्थित रहीं। विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग, कला संकाय द्वारा यह आयोजन किया जा रहा है, 18 मार्च तक आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर से आए दो दर्जन से अधिक कलाकारों ने अपनी कूंची से कैनवास में रंग भरने का काम किया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता कर रहे कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे ने अपने उद्बोधन में कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति के संवाहक के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि चित्रकला मनुष्य की संवेदनाओं, विचारों और अनुभवों को रंगों के माध्यम से व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। विश्वविद्यालय में आयोजित इस प्रकार की राष्ट्रीय कार्यशालाएं विद्यार्थियों और कलाकारों को अपनी प्रतिभा को निखारने तथा एक-दूसरे से सीखने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने प्रतिभागी कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस आयोजन से कला और संस्कृति के क्षेत्र में नई प्रेरणा मिलेगी। कुलगुरु प्रो आलोक चौबे ने कहा कि यह कार्यशाला हमारे कल्पनाशील विचारों को एक नया आकार और दिशा देने का अदभुत मंच है। कलाकार का काम केवल आकृति बनाना नहीं अपितु उस आकृति के माध्यम से एक अनकही कहानी को बयां करना भी है।

मुख्य अतिथि सुश्री गीता दास ने कहा कि चित्रकला केवल तकनीक का अभ्यास नहीं बल्कि जीवन की अनुभूतियों को रंगों में ढालने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं युवा कलाकारों के लिए अत्यंत उपयोगी होती हैं, जहां वे वरिष्ठ कलाकारों के मार्गदर्शन में अपनी कला को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना की।
शुभारंभ सत्र के प्रथम चरण में कार्यक्रम समन्वयक डॉ अभय कुमार वर्मा ने कलाकारों के वैशिष्ट्य का परिचय कराया। आयोजन के उद्देश्य प्रकाश डालते हुए विभागाध्यक्ष डॉ प्रसन्न पाटकर ने कला के बहुआयामी दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। अधिष्ठाता कला संकाय प्रो नन्द लाल मिश्रा ने कहा कि चित्रकला, मूर्तिकला सहित अन्य कलात्मक गतिविधियां केवल रंग ही नहीं बल्कि विचारों और भावनाओं की जीवंत अभिव्यक्ति है।

कार्यक्रम के दौरान कला वीथिका में प्रदर्शित विभिन्न चित्रों का अवलोकन अतिथियों द्वारा किया गया। प्रदर्शनी में देश के विभिन्न भागों से आए कलाकारों द्वारा तैयार किए गए चित्र प्रदर्शित किए गए हैं, जिनमें प्रकृति, लोकजीवन, संस्कृति, सामाजिक सरोकार तथा समकालीन विषयों को आकर्षक रंगों और शैली में प्रस्तुत किया गया है।
कार्यशाला के दौरान तीन दिनों तक कलाकारों द्वारा लाइव पेंटिंग, संवाद सत्र तथा कला तकनीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। रंग बसंत प्रदर्शनी के आयोजक डॉ राकेश कुमार और क्यूरेटर मनु वर्मा ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस आयोजन के माध्यम से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा स्थानीय कला प्रेमियों को अनुभवी कलाकारों के साथ प्रत्यक्ष संवाद और सीखने का अवसर मिलेगा।
