बीबीएयू में ‘मानवाधिकारों के उभरते आयाम’ विषय पर हुआ एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में मंगलवार 24 मार्च को मानवाधिकार विभाग, बीबीएयू एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संयुक्त तत्वावधान में ‘मानवाधिकारों के उभरते आयाम’ विषय पर एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने की। मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. एस.के. भटनागर उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर विधि अध्ययन विद्यापीठ के संकायाध्यक्ष प्रो. संजीव कुमार चढ्ढा, मानवाधिकार विभाग, बीबीएयू के विभागाध्यक्ष एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम की निदेशक प्रो. प्रीति मिश्रा, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अजय सिंह कुशवाहा एवं आयोजित सचिव डॉ. राशिदा अतहर मौजूद रहीं। सर्वप्रथम संकायाध्यक्ष प्रो. संजीव कुमार चढ्ढा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया।

विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि मानवाधिकारों का वास्तविक उद्देश्य केवल अधिकार प्रदान करना नहीं, बल्कि मानव जीवन को सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों के संरक्षण और मानवीय मूल्यों को केंद्र में रखकर कार्य करने के लिए हमें तीन प्रमुख कारक सुरक्षा (Security), सुरक्षित वातावरण (Safety) और स्वावलंबन (Self-reliance) को विशेष महत्व देना चाहिए।

मुख्य अतिथि एवं डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. एस.के. भटनागर ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान की ओर से मौलिक अधिकारों के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति को शांति, सुरक्षा और समाज के समग्र विकास का अधिकार भी दिया गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान समय में केवल अधिकारों की मांग करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हमें अपने अधिकारों के अनुरूप कर्तव्यों का निर्वहन भी करना चाहिए।

मानवाधिकार विभाग की विभागाध्यक्ष, बीबीएयू एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम की निदेशक प्रो. प्रीति मिश्रा ने मानवाधिकारों के उल्लंघन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बदलते समय में तकनीकी प्रगति के साथ नई चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि जहाँ एक ओर यह तकनीक मानवाधिकारों के संरक्षण में सहायक हो सकती है, वहीं इसके दुरुपयोग से निजता के हनन और भेदभाव जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।

इस अवसर पर प्रतिभागियों के लिए चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। प्रथम तकनीकी सत्र उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की डॉ. शश्या मिश्रा एवं द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ. चन्द्र सेन प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्त तृतीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता एमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर के प्रो. तपन कुमार चंडोला एवं चतुर्थ तकनीकी सत्र की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ. भानु प्रताप द्वारा की‌ गयी।

डॉ. अजय सिंह कुशवाहा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के दौरान प्रो. शशि कुमार, डॉ. रश्वेत श्रृंखल, अन्य शिक्षक, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं अन्य विद्यार्थी मौजूद रहे।

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