बीबीएयू में ‘उद्यमिता से समावेशी विकास : बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की दृष्टि मेंं’ राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित एवं युवा उद्यमी हुए सम्मानित

अशोक यादव, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय द्वारा सोमवार 11 से 14 अप्रैल तक चार दिवसीय ‘अम्बेडकर जयंती’ तथा ‘विश्वविद्यालय स्थापना दिवस’ के अवसर पर विविध शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगोष्ठियों और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के तीसरे दिन सोमवार 13 अप्रैल को ‘उद्यमिता से समावेशी विकास: बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की दृष्टि मेंं’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कार्यवाहक कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा द्वारा की गयी। मुख्य अतिथि के तौर पर टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुम्बई के कुलपति प्रो. बद्री नारायण तिवारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर स्थायी आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. के.एल. महावर एवं प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा मौजूद रहे। मंच संचालन का कार्य डॉ. सूफिया अहमद द्वारा किया गया।

प्रो. सुनीता मिश्रा ने अपने संबोधन में डॉ. भीमराव अम्बेडकर को आधुनिक भारत और सामाजिक न्याय का शिल्पकार बताया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने एक नए भारत का वैचारिक ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया, जिसमें समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों को केंद्र में रखा गया। उन्होंने विधिक और सामाजिक अवधारणाओं की मजबूत नींव रखी तथा विश्व की श्रेष्ठ लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं से प्रेरणा लेकर भारतीय संविधान का निर्माण किया। एक दूरदर्शी सामाजिक सुधारक के रूप में उन्होंने संविधान को केवल एक कानूनी दस्तावेज न बनाकर उसे समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया, जिससे हर वर्ग को न्याय और अधिकार मिल सके। प्रो. मिश्रा ने आगे कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने समाज में व्याप्त छुआछूत, असमानता और भेदभाव जैसी कुरीतियों को समाप्त करने के लिए निरंतर संघर्ष किया। उन्होंने स्त्री शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह और हिंदू कोड बिल जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुधारों को प्राथमिकता देकर महिलाओं को अधिकार और सम्मान दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया। बाबासाहेब का जीवन संघर्ष, शिक्षा और आत्मसम्मान का प्रतीक है, जो आज भी समाज को दिशा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि उनके विचार न केवल सामाजिक न्याय की स्थापना में सहायक हैं, बल्कि एक समावेशी और प्रगतिशील भारत के निर्माण की आधारशिला भी रखते हैं।

प्रो. बद्री नारायण तिवारी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि मानव शरीर सबसे जटिल संरचना है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने गुणों का संचय करते हुए अपने व्यक्तित्व का पुनर्संगठन करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हमें पुनर्विचार करने की आवश्यकता है कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर के आदर्श और संदेश क्या हैं क्योंकि उन्हीं आदर्शों को अपनाकर ही एक समावेशी समाज का निर्माण संभव है। उनके अनुसार विकास एक सतत गति की प्रक्रिया है, अतः नीति-निर्माताओं को इस प्रकार कार्य करना चाहिए कि विकास की धारा में समाज के प्रत्येक वर्ग को समान रूप से शामिल किया जा सके।

प्रो. के.एल. महावर ने कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से अम्बेडकर के समता, न्याय और मानवाधिकार संबंधी सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष मनीष वर्मा ने अपने उद्बोधन में संगठन की भूमिका और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संस्था वंचित एवं हाशिये पर रहे समुदायों को उद्यमिता के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर उद्यमियों को उनके उत्कृष्ट कार्यों, नवाचारपूर्ण प्रयासों एवं समाज के प्रति महत्वपूर्ण योगदान के लिए स्मृति चिन्ह, प्रमाण पत्र एवं अंगवस्त्र भेंट करके सम्मानित किया गया। इन प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों में शिक्षा साथी प्राइवेट लिमिटेड के को- फाउंडर एवं स्मार्टएक्स शक्ति फाउंडेशन के संस्थापक मनीष कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं किसान और हैंडलूम एवं हस्तशिल्प उद्योग से जुड़ी श्रीमती आरती देवी राणा, जनजातीय शिल्प इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के धर्मेन्द्र कुमार, न्यू विज़न एकेडमी इंटर कॉलेज, लखनऊ की प्राचार्या तथा डीआईसीसीआई वूमेन विंग की समन्वयक श्रीमती रेणु चौधरी, शुभांगी हॉस्पिटल, सुल्तानपुर के निदेशक डॉ. राजेश गौतम, पिक्सल पावर एंड एनर्जी एलएलपी की संस्थापक – अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा सरोज, नवोदय ग्रोथ प्रा. लि. तथा पार्टनर, नवोदय एचआर सर्विसेज के संस्थापक एवं निदेशक, अरविन्द कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं स्टेम सेल प्रोग्राम लीडर, डॉ. रजनीश वर्मा , दौलत गृह उद्योग कंपनी की‌ संस्थापक श्रीमती संगीता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं हेल्प वाइ गोड ट्रस्ट के संस्थापक संजय कुमार, शिक्षा साथी की संस्थापक श्रीमती अर्चना जैसल एवं जनजातीय शिल्प इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक श्रीमती निकिता रावत शामिल रहीं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देते हुए समाज के विकास और सशक्तिकरण को नई दिशा प्रदान की है। 

इस अवसर पर विश्वविद्यालय स्वास्थ्य केंद्र एवं ज्योति डेंटल सेंटर के संयुक्त सहयोग से स्वास्थ्य शिविर का सफल आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को दंत परीक्षण के साथ-साथ डिजिटल एक्स-रे जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की गईं। स्वास्थ्य शिविर के दौरान लगभग 100 से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य शिविर का लाभ उठाया।

कार्यक्रम के दौरान ‘समावेशी विकास, विकसित भारत का आधार: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर की दृष्टि में’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता एवं नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता करते हुए अपने विचारों और रचनात्मकता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम समिति की अध्यक्षा डॉ. मोनिका शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी भव्य आयोजन किया गया, जिसमें नृत्य, गीत आदि की आकर्षक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत एवं प्रेरणादायी बना दिया। साथ ही एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीण उद्योग, हस्तशिल्प, पारंपरिक कला एवं विविध लोक उत्पादों से संबंधित वस्तुओं का अत्यंत सजीव, आकर्षक एवं सराहनीय प्रदर्शन प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे, प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने धन्यवाद ज्ञापित किया !

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