लखनऊ से दुनिया को शांति का संदेश : कला, संगीत और व्यंजन उत्सव की हुई शुरूआत

अनुपूरक न्यूज़ एजेंसी, लखनऊ : दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और संघर्ष के बीच लखनऊ से कला, संस्कृति और खानपान के जरिए शांति और एकता का संदेश देने की एक खास पहल शुरू हुई है। उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार और व्हाइटस्वान आर्ट के सहयोग से ‘विश्व शांति एवं स्थिरता के लिए समर्पित कला, संगीत और व्यंजन उत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है।

इस चार दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत रविवार को शहीद स्मृति भवन में हुई। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय के आर्ट कॉलेज के पूर्व डीन प्रो. जय कृष्ण अग्रवाल मौजूद रहे। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में लेखक डॉ. रवि भट्ट और प्रो. सुधीर मिश्रा भी शामिल हुए। इस दौरान कला और मीडिया की भूमिका जैसे अहम विषयों पर चर्चा की गई, जिसमें बताया गया कि कला सिर्फ देखने की चीज नहीं, बल्कि यह सोच और समाज को जोड़ने का माध्यम है।

कार्यक्रम के पहले दिन संगीत प्रस्तुतियों ने माहौल को खास बना दिया। ‘अवध छैला मोहे नैना न मारो’ और ‘हे दुख भंजन मारुति नंदन’ जैसे गीतों को जगजीता मौर्य और लाडली सिंह भारद्वाज ने अपनी आवाज से जीवंत कर दिया। इसके साथ ही एक आर्ट प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसमें प्रदेश के अलग-अलग कलाकारों की पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं, जो लोगों को काफी आकर्षित कर रही हैं।

आगे इस कार्यक्रम में कई और खास आयोजन होंगे। 23 मार्च को ‘विश्व शांति एवं स्थिरता में समर्पित कला’ विषय पर पैनल चर्चा और उभरते कलाकारों का संगीत कॉन्सर्ट होगा। इसके साथ ही प्रदेश के पारंपरिक और ‘विस्मृत व्यंजनों’ के स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां यूनेस्को के गैस्ट्रोनॉमी दर्जे का जश्न भी मनाया जाएगा। 24 मार्च को PYSSUM संस्था के सहयोग से विशेष जरूरतों वाले और वंचित बच्चों के लिए आर्ट कैंप आयोजित किया जाएगा, जबकि 25 मार्च को कार्यक्रम का समापन होगा।

इस आयोजन के पीछे व्हाइटस्वान आर्ट का उद्देश्य साफ है-कला, संगीत और भोजन के जरिए लोगों को जोड़ना और दुनिया में शांति का संदेश फैलाना। संस्था का मानना है कि कला इंसानियत की पहचान है और यह हर तरह की सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ती है। वहीं संगीत को एक ऐसी ताकत माना गया है, जो बिना किसी भेदभाव के हर दिल तक पहुंचती है और समाज में सामंजस्य बनाने में अहम भूमिका निभाती है।

इस पहल पर अपने विचार रखते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, आज के समय में जब दुनिया कई तरह की चुनौतियों और तनाव से गुजर रही है, ऐसे में कला, संस्कृति और खानपान जैसे माध्यम समाज को जोड़ने की सबसे मजबूत कड़ी बन सकते हैं। ऐसे आयोजन सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं होते, बल्कि ये लोगों के बीच संवाद, समझ और सामंजस्य को बढ़ाते हैं। हमारी कोशिश है कि उत्तर प्रदेश को सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से एक ऐसे मंच के रूप में विकसित किया जाए, जहां से शांति, सह-अस्तित्व और मानवीय मूल्यों का संदेश पूरे देश और दुनिया तक पहुंचे।

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