
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के मार्गदर्शन में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा “केंद्रीय बजट 2026–27 का विश्लेषण : नीडोनॉमिक्स परिप्रेक्ष्य” विषय पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि के तौर पर नीडोनॉमिक्स विचारधारा के प्रवर्तक तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग से सेवानिवृत्त प्रो. मदन मोहन गोयल उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सनातन नायक ने की।
मुख्य अतिथि प्रो. मदन मोहन गोयल ने ₹ 53,47,315 करोड़ के परिव्यय वाले केंद्रीय बजट 2026–27 को “आवश्यक, लेकिन पर्याप्त नहीं” बताते हुए विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए और ठोस कदमों की आवश्यकता पर बल दिया। नीतिगत प्रभावशीलता पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने चेताया कि अत्यधिक रियायतों (फ्रीबीज) पर निर्भरता नीतियों को परिवर्तनकारी बनाने के बजाय “सांत्वना” बना सकती है।
करदाताओं के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 2.6 प्रतिशत आयकर देता है (जो जीडीपी का 6.68 प्रतिशत योगदान करता है), जो सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की आवश्यकता को रेखांकित करता है। रक्षा व्यय में 15 प्रतिशत वृद्धि के उचित ठहराते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा केवल बाहरी खतरों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें आंतरिक चुनौतियाँ जैसे बेरोजगारी और विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में अव्यवस्थाएँ भी शामिल होनी चाहिए, जो “जय जवान, जय किसान” की भावना को प्रतिबिंबित करता है।
व्याख्यान का समापन एक रोचक संवाद सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को वित्तीय नीति और राष्ट्रीय विकास पर नीडोनॉमिक्स के समग्र दृष्टिकोण से समृद्ध किया गया।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने व्याख्यान के आयोजन में विशेष रुचि दिखाने की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान प्रो. राम चंद्रा, डॉ. वी.एस. बघेल, प्रो. सुरेंद्र मेहर, डॉ. प्रणब कुमार आनंद, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।