आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने रु 583 करोड़ के हरियाणा के सरकारी भुगतान के साथ कायम रखा भरोसा

सूर्योदय भारत समाचार सेवा, मुंबई : आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने चंडीगढ़ स्थित अपनी एक शाखा में हरियाणा सरकार के कुछ विभागों के खातों से जुड़े हालिया मामले पर अपनी पूर्व जानकारी का संदर्भ दिया है। प्रारंभिक जाँच में संकेत मिले हैं कि शाखा के कुछ कर्मचारियों ने कथित रूप से जाली दस्तावेज़ों और भुगतान निर्देशों को क्लियर करने में धोखाधड़ी की और संभव है कि इसमें बाहरी लोगों की मिलीभगत भी रही हो। मामले की फिलहाल संबंधित प्राधिकरणों द्वारा जाँच की जा रही है। जाँच जारी रहने के बावजूद, बैंक ने तुरंत कदम उठाते हुए हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों द्वारा दावा की गई मूल राशि और ब्याज का 100% भुगतान कर दिया है, जिसकी कुल राशि 583 करोड़ रुपए है। अंतिम राशि में आगे किसी अतिरिक्त दावे या मिलान प्रक्रिया के आधार पर बदलाव हो सकते हैं।

हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों ने इस मामले में बैंक के सिद्धांत आधारित रुख, त्वरित कार्रवाई और पेशेवर आचरण की सराहना करते हुए, आभार व्यक्त किया है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने हरियाणा सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पूर्ण सहयोग से यह स्पष्ट किया है कि वह धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और उन्हें न्याय के कटघरे तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

बैंक वित्तीय रूप से मजबूत और बेहतर पूँजी स्थिति में है। 31 दिसंबर, 2025 तक बैंक को फिक्स्ड डिपॉजिट्स के लिए क्रिसिल द्वारा एएए रेटिंग प्राप्त है, जबकि दीर्घकालिक रेटिंग में क्रिसिल, आईसीआरए, इंडिया रेटिंग्स और केयर से एए+ रेटिंग प्राप्त है। बैंक का कुल ग्राहक व्यवसाय (ऋण और जमा) 5,62,090 करोड़ रुपए पर पहुँच गया है, जो साल-दर-साल 22.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है, जिसमें ग्रॉस एनपीए 1.69 प्रतिशत और नेट एनपीए 0.53 प्रतिशत है। बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 16.22 प्रतिशत और सीएएसए रेशियो 51.6 प्रतिशत है।

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