
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, रायपुर : पत्नी के वर्जिनिटी टेस्ट की पति की मांग पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लताड़ते हुए कहा कि- यह महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का कहना है कि- किसी भी महिला को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है. एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट कराने की मांग की थी, जो यह साबित करना चाहता था कि उसकी पत्नी का किसी और के साथ अफेयर है.
जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने ऐसी आपत्तिजनक मांग पर कहा कि- वर्जिनिटी टेस्ट की इजाजत देना महिला के मौलिक अधिकारों, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और उसकी निजी गरिमा के खिलाफ होगा. उस व्यक्ति ने फैमिली कोर्ट के वर्ष 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी अर्जी खारिज कर दी गई थी.
उधर, उसकी पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसका पति नपुंसक है और वह उसके साथ रिश्ते बनाने से इनकार करता है.
इस मामले में अदालत ने कहा कि वह व्यक्ति अपनी नपुंसकता के आरोप को गलत साबित करने के लिए मेडिकल टेस्ट करा सकता है, लेकिन उसे अपनी पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट कराने और अपने सबूतों में कमियों को भरने की इजाजत नहीं दी जा सकती.
इस मामले में हाईकोर्ट का कहना है कि- याचिकाकर्ता की मांग असंवैधानिक है, यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करती है, जिसमें महिलाओं की गरिमा का अधिकार शामिल है.
अदालत का यह भी कहना है कि- अनुच्छेद 21 केवल जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी नहीं देता, बल्कि गरिमा के साथ जीने का अधिकार भी देता है, जो महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है, लिहाजा किसी भी महिला को उसका वर्जिनिटी टेस्ट कराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता!