
सूर्योदय भारत समाचार सेवा : नेपाल में बागमती नदी के किनारे पर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन के बिना केदारनाथ मंदिर की यात्रा अधूरी मानी जाती है। बता दें कि इस मंदिर में पंचमुखी शिवलिंग स्थापित है। इसके दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर इस मंदिर को पशुपतिनाथ मंदिर क्यों कहा जाता है।
महाभारत में वर्णित पौराणिक कथा के मुताबिक महाभारत युद्ध में पांडवों द्वारा किए गए नरसंहार से महादेव पांडवों से क्रोधित थे। युद्ध के बाद पाप मुक्ति के लिए पांडवों ने भगवान शिव की खोज की। तो भगवान शिव ने केदारनाथ में एक महिष यानी भैंसे का रूप धारण कर लिया और वह जमीन के अंदर छिप गए। लेकिन महाबली भीम ने महादेव को ढूंढ लिया और पीछे से पकड़कर बाहर खींचने लगे।
लेकिन तब भगवान शिव का सिर पशुपतिनाथ में उत्पन्न हुआ था। जहां पर आज पशुपतिनाथ मंदिर स्थापित है। वहीं महादेव के शरीर का अन्य हिस्सा केदारनाथ और अन्य पंच केदार स्थलों पर विभाजित हो गए थे। इसलिए माना जाता है कि केदारनाथ में भगवान शिव के शरीर और पशुपतिनाथ में उनके मुख के दर्शन होते हैं।
पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार भगवान शिव एक हिरण के रूप में हिमालय की गुफा में रहने लगे थे। उधर मां पार्वती समेत अन्य देवी-देवता भी महादेव की खोज करने लगे। तब उन्होंने पाया कि भगवान शिव जी एक पशु के रूप में हिमालय की गुफा में रह रहे हैं। तब सभी लोगों ने भगवान शिव से अनुरोध किया कि वह अपने वास्तविक रूप में आएं और सभी प्राणियों के स्वामी बनें। महादेव इस प्रार्थना से प्रसन्न हुए और उन्होंने स्वयं को पशुपतिनाथ के रूप में प्रकट किया।