भावनाओं के बिना इंसानी जीवन का कोई अर्थ नहीं है। ऐसा इंसान जिसके दिल में प्रेम या सहानुभूति न हो, उसे एक जीवित लाश कहने में कोई गुर्रेज नहीं है। हमारा शरीर और मस्तिष्क बहुत हद तक एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं। यही वजह है कि हमारी भावनाएं …
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